मुंबई, एएनआई: बाम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार में मंत्री नवाब मलिक के बड़बोलेपन पर सख्ती दिखाई है। कोर्ट से जारी एक नोटिस में मंत्री और एनसीपी नेता नवाब मलिक को निर्देश दिए गए हैं कि वो एक हलफनामा दायर कर बताएं कि ज्ञानदेव वानखेड़े और उनके परिवार के खिलाफ बयानों के संबंध कोर्ट के आदेशों का "जानबूझकर उल्लंघन" करने पर उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए। आपको बतादें, नवाब मलिक ने पूर्व में कोर्ट को आश्वासन दिया था कि वो ऐसा नहीं करेंगे।

क्या है मामला

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो, मुंबई के जोनल डायरेक्टर समीर वानखेड़े के पिता ज्ञानदेव वानखेड़े ने बाम्बे हाईकोर्ट के समक्ष एक हलफनामा दायर किया है। उन्होंने महाराष्ट्र के मंत्री नवाब मलिक के खिलाफ अदालत की अवमानना के आरोप लगाए हैं। हलफनामा में उन्होंने कहा है कि अदालत में वचन देने के बावजूद मलिक ने उनके परिवार के खिलाफ बयान बाजी जारी रखी है। जबकी उन्होंने कहा था कि वो ऐसा नहीं करेंगे। नवंबर में नवाब मलिक ने बाम्बे हाईकोर्ट की एक खंडपीठ के सामने एक अंडरटेकिंग दी थी कि वो समीर वानखेड़े के खिलाफ तब तक ट्वीट नहीं करेंगे जब तक कि अदालत मामले की अगली सुनवाई नहीं कर लेती।

आपको बतादें, कोर्ट पहले भी नवाब मलिक को जाति जांच समिति से संपर्क नहीं करने की जगह मीडिया में वानखेड़े के जाति प्रमाण पत्र के बारे में आरोप लगाने के लिए फटकार लगाई थी। उन्होंने समीर वानखेड़े की मां का मृत्यु प्रमाण पत्र साझा करते हुए आरोप लगाए थे कि एनसीबी अधिकारी ने फर्जी दस्तावेज बनाए थे। आरोपों के मुताबिक जाहिदा दाऊद वानखेड़े के दो मृत्यु प्रमाण पत्र हैं, दोनों में अलग अलग धर्मों का उल्लेख किया गया है। मलिक ने दोनों मृत्यु प्रमाण पत्रों को ट्विटर पर साझा भी किया था। गौरतलब है कि क्रूज ड्रग्स मामले में आर्यन खान की गिरफ्तारी के बाद से ही महाराष्ट्र सरकार में मंत्री नवाब मलिक, समीर वानखेड़े पर लगातार हमलावर हैं।

Edited By: Amit Singh