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'हर तरफ लाशें थीं', पहलगाम हमले का खौफनाक मंजर; सबसे पहले पहुंचने वाले शख्स ने सुनाई दिल दहला देने वाली कहानी

Published: Mon, 20 Apr 2026 08:13 AM (IST)

पहलगाम के बैसरन घाटी में हुए आतंकी हमले की भयावह यादें आज भी ताजा हैं। पोनीवालों के अध्यक्ष अब्दुल वहीद ...और पढ़ें

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। पहलगाम के बैसरन घाटी में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले की तस्वीरें आज भी वहां सबसे पहले पहुंचने वाले लोगों के मन से नहीं मिट रही हैं। इस हमले में 26 पर्यटकों और एक स्थानीय पोनीवाले की मौत हो गई थी, जबकि 17 लोग घायल हुए थे।

घटना के समय पोनीवालों के एक बड़े संगठन के अध्यक्ष अब्दुल वहीद वानी सबसे पहले मौके पर पहुंचे थे। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक उन्हें पुलिस का फोन आया था कि बैसरन में कुछ बड़ा हुआ है। वह पास के गांव में थे और छोटा रास्ता लेकर पुलिस से पहले ही वहां पहुंच गए। वानी ने बताया कि वहां का मंजर बेहद डरावना था। हर तरफ लोग रो रहे थे और कई जगह लाशें बिखरी पड़ी थीं। यह सब देखकर उन्हें लगा कि शायद वह खुद भी वहां से वापस नहीं जा पाएंगे।

घायलों की मदद में जुटे

वानी ने बताया कि उन्होंने एक दुकान से पानी की बोतल उठाई और रो रही एक महिला को दी। उन्होंने उसे समझाया कि पुलिस और प्रशासन रास्ते में हैं। इसके बाद उन्होंने अपने व्हाट्सएप ग्रुप में करीब 700 पोनीवालों को मदद के लिए बुलाया, लेकिन सुरक्षा कारणों से सिर्फ 15 लोग ही वहां पहुंच पाए। उन्होंने मिलकर घायलों को संभाला और लाशों को एक जगह इकट्ठा किया। वानी के अनुसार, कई शवों पर सिर में गोली लगी थी, जिससे हालात और भी भयावह थे।

वानी ने कहा कि उस दिन की कई आवाजें आज भी उनके कानों में गूंजती हैं। एक महिला अपने पति को छोड़कर जाने को तैयार नहीं थी और बार-बार कह रही थी कि वह अकेले कैसे जाए। उन्हें एक घायल व्यक्ति भी मिला, जो सात शवों के बीच जिंदा पड़ा था। उसके गले और हाथ में गोली लगी थी, लेकिन वह बोल पा रहा था। उन्होंने कहा कि उस व्यक्ति की आवाज और उसके शब्द आज भी उन्हें याद हैं और बार-बार परेशान करते हैं।

आज भी नहीं मिटीं यादें

वानी और उनके साथियों ने कई घायलों को नीचे तक पहुंचाया। एक व्यक्ति को उन्होंने कंधे और फिर चारपाई पर उठाकर नीचे लाया, जिसकी जान बच गई। हालांकि, उस दिन की घटनाएं वानी को आज भी अंदर से झकझोर देती हैं।

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