नई दिल्ली, एजेंसी। इस सप्ताह ब्लू मून दिखेगा। दरअसल, अक्टूबर माह के अंतिम शनिवार को दुर्लभ चांद देखने को मिलेगा। सामान्य तौर पर हर माह एक बार पूर्णिमा और एक बार अमावस्या होती है लेकिन इस बार एक ही माह में दो बार आसमान में पूरा चांद खिल रहा है। इस तरह की घटना में महीने के दूसरे पूर्णिमा के चांद को 'ब्लू मून' कहते हैं।

दिल्ली के नेहरू तारामंडल की निदेशक एन रत्नाश्री ने बताया, '30 दिन के महीने के दौरान ब्लू मून होना कोई आम बात नहीं है।' उन्होने आगे बताया कि 30 दिन वाले महीने में पिछली बार 30 जून, 2007 को ‘ब्लू मून' रहा था । उन्होंने कहा कि वर्ष 2018 में दो बार ऐसा अवसर आया जब ‘ब्लू मून' की घटना हुई। उस दौरान पहला ‘ब्लू मून' 31 जनवरी जबकि दूसरा 31 मार्च को हुआ। 

हालांकि इसे ब्लू मून कहा जाता है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि चांद ब्लू होगा। इसका अर्थ समय से है जब एक माह में दूसरी बार पूरा चांद (full moon) दिखेगा। उल्लेखनीय है कि 1 अक्टूबर को पूर्णिमा थी और अब 31 अक्टूबर को पूर्णिमा होगी। नेहरू तारामंडल के निदेशक अरविंद प्रांजपेय ने चंद्रमा के इस संयोग का जिक्र करते हुए बताया कि 'चंद्र मास की अवधि 29.531 दिनों अथवा 29 दिन, 12 घंटे, 44 मिनट और 38 सेकेंड की होती है, इसलिए एक ही महीने में दो बार पूर्णिमा होने के लिए पहली पूर्णिमा उस महीने की पहली या दूसरी तारीख को होनी चाहिए।'

शनिवार को शरद पूर्णिमा की रात को आसमान में ब्लू मून अफ्रीका, अमेरिका,  यूरोप समेत एशिया के कई देशों में देखा जा सकता है। इस रात को चांद आम दिनों से अलग अनोखी चमक के साथ ही आकार में 14 फीसद बड़ा दिखेगा। अब यह अद्भुत खगोलीय संयोग तीन साल बाद 2023 के अगस्त माह में आएगा। बता दें कि एक  साल में 12 बार फुल मून यानि पूर्णिमा होता है और तीन साल में एक अद्भुत संयोग ऐसा होता है  जब 13 बार फुल मून होते हैं। ऐसे में जिस माह दो फुल मून होते हैं, उस माह दूसरे फुल मून को ब्लू मून कहा जाता है। अक्टूबर में इस बार दो फुल मून होने जा रहे हैं तो 31 अक्टूबर के फुल मून को ब्लू मून कहा जाएगा। 

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