नई दिल्‍ली, ऑनलाइन डेस्‍क। जिन मॉल में कुत्‍ते तक को फटकने नहीं दिया जाता था वहां नीलगाय का नजर आना अपने-आप में खास है। 21 दिनों के लॉकडाउन में लोग जहां घरों में क्‍वारंटाइन हैं वहीं जंगली जानवर आजाद हो शहरी इलाकों की सैर कर रहे हैं। मुंबई के समंदर में जहां डॉलफिन कूद रहीं हैं वहीं केरल में जंगली बिलाव (Civet) सड़क पर घूमता नजर आया। चंडीगढ़ व हरिद्वार में सांबर जैसे जानवर सड़क पर दिख रहे हैं। इसके अलावा असम, उत्‍तराखंड व दक्षिण भारत में हाथी शहरी इलाकों में घूमते नजर आ रहे हैं।

कोरोना वायरस के संकट ने दुनियाभर को अपने चपेट में ले रखा है। इसके तहत भारत में Complete Lockdown है। 21 दिनों के लॉकडाउन में और भी काफी अच्‍छी चीजें सामने आ रहीं हैं। इसमें सबसे पहले जंगल व मनुष्‍यों की दुनिया के बीच की दीवार गिरती नजर आ रही है क्‍योंकि मशीनें चुप है, सड़केें वीरान हैं।

पूरा देश अभी सन्‍नाटे में है। इस सन्‍नाटे से जानवरों का शहरों की ओर आना शुरू हो गया है, जिन पक्षियों का कलरव नहीं सुनाई देता था वह अब सुनाई देने लगा है। इसका संकेत शुक्रवार शाम को देखने को मिला। दरअसल, नोएडा स्‍थित जीआईपी मॉल में एक जंगली जानवर पहुंच गया। जंगलों में घूमने वाली नीलगाय मॉल का सैर करती नजर आई।

सोशल मीडिया पर तमाम लोगों की प्रतिक्रियाएं आई जिसमें कहा गया है कि प्रकृति अपना जगह वापस चिन्‍हित करने आ रही है।  सोशल मीडिया यूजर ने लिखा है, 'कुछ दिन पहले तक आजादी से लोग घूम रहे थे और जानवर कहीं दुबके पड़े थे और आज जानवर आजाद हैं और लोग अपने घरों में दुबके पड़े हैं।'

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किए गए लॉकडाउन के ऐलान के बाद लोग घरों में बंद हैं। लोगों की आपा-धापी भी खत्‍म है। सूनी पड़ी सड़कों पर गाड़ियों के हॉर्न नहीं सुनाई दे रहे न तो कहीं से लाउडस्‍पीकर की आवाजें आ रहीं हैं। अब चिड़ियों का चहचहाना स्‍पष्‍ट सुनाई देता है ।

संयुक्‍त राष्‍ट्र के पर्यावरण प्रमुख इंगर एंडरसन (Inger Andersen) ने कहा, ‘प्रकृति हमें कोरोना वायरस महामारी व मौजूदा जलवायु संकट के जरिए संदेश दे रही है।’ एंडरसन ने कहा कि प्रकृति की दुनिया में घुसपैठ का ही मनुष्‍यों को मुआवजा मिल रहा है। कोरोना वायरस से फैले संक्रमण को रोकने के लिए दुनियाभर के तमाम देशों में कई प्रयास किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने भी लॉकडाउन के साथ ही देश की जनता से घरों में रहने की अपील की है। इसका असर देशभर में दिखाई दे रहा है।

विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन द्वारा शनिवार दोपहर 12 बजे जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, दुनिया भर के 201 देशों में फैले संक्रमण के कुल मामले 512,701 हैं वहीं इससे अब तक 23,495 लोगों की मौत हो चुकी है। द गार्जियन में प्रकाशित एक खबर के अनुसार, आगे इस तरह की महामारी या किसी और दुष्‍प्रभाव को रोकने के लिए ग्‍लोबल वार्मिंग के साथ खेती, खनन या बिल्‍डिंग बनाने के लिए जंगलों का विनाश रोकना होगा।

Posted By: Monika Minal

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