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फिर घर-घर जाएंगे बीएलओ, बंगाल में होगा SIR सत्यापन; शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक काम में लगाने से बढ़ी नाराजगी

Published: Sun, 04 Oct 2026 05:30 AM (IST)

एसआईआर से पहले की मतदाता सूची और मौजूदा सूची का मिलान करने के बाद छूटे मतदाताओं की सूची तैयार की ...और पढ़ें

फिर घर-घर जाएंगे बीएलओ, बंगाल में होगा SIR सत्यापन (सांकेतिक तस्वीर)

फिर घर-घर जाएंगे बीएलओ, बंगाल में होगा SIR सत्यापन (सांकेतिक तस्वीर)

HighLights

  1. एसआईआर की सूची से छूटे मतदाताओं के सत्यापन की तैयारी

  2. वार्षिक परीक्षाओं के बीच शिक्षकों पर अतिरिक्त जिम्मेदारी का दबाव

राज्य ब्यूरो, कोलकाता। बंगाल में मतदाता सूची के पुनरीक्षण के तहत एक बार फिर बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) को घर-घर जाकर सत्यापन का काम करना पड़ सकता है।

एसआईआर से पहले की मतदाता सूची और मौजूदा सूची का मिलान करने के बाद छूटे मतदाताओं की सूची तैयार की जाएगी।

इसके बाद बीएलओ संबंधित लोगों के घर जाकर उनकी मौजूदा स्थिति का सत्यापन करेंगे। इस काम में स्कूल शिक्षकों को फिर बीएलओ के रूप में लगाने की आशंका से शिक्षकों में नाराजगी बढ़ रही है।

शिक्षकों का कहना है कि पिछले वर्ष नवंबर से एसआइआर का काम शुरू होने के बाद से ही कई स्तर पर पढ़ाई प्रभावित हुई। इसके बाद 2026 की शुरुआत में उच्च माध्यमिक परीक्षा और फिर विधानसभा चुनाव से जुड़ी जिम्मेदारियां भी शिक्षकों को दी गईं।

अब एसआईआर का काम पूरा होने के बाद जनगणना संबंधी जिम्मेदारी और फिर बीएलओ का काम मिलने की आशंका है। शिक्षकों का कहना है कि दुर्गापूजा की छुट्टियों के बाद स्कूल खुलते ही विभिन्न कक्षाओं की वार्षिक परीक्षाएं शुरू होंगी।

नवंबर-दिसंबर में परीक्षाओं के बाद माध्यमिक और उच्च माध्यमिक परीक्षाओं की तैयारी भी शुरू हो जाएगी। ऐसे समय में घर-घर जाकर मतदाता सूची का सत्यापन करने की जिम्मेदारी मिलने से पढ़ाई पर और असर पड़ने की आशंका है।

बीएलओ मंच ने भी जताया विरोध

वोटकर्मी एवं बीएलओ मंच ने भी शिक्षकों को बार-बार गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाने पर नाराजगी जताई है। संगठन के महासचिव स्वपन मंडल ने कहा कि शिक्षकों को लगातार स्कूल के मूल काम से अलग जिम्मेदारियां दिए जाने का सीधा असर पठन-पाठन पर पड़ता है।

उनका कहना है कि लगातार प्रशासनिक और चुनावी जिम्मेदारियां मिलने से शिक्षकों के लिए स्कूल में नियमित समय देना मुश्किल हो रहा है और इसका सबसे अधिक नुकसान विद्यार्थियों को उठाना पड़ रहा है।