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बोडोलैंड की एक दर्जन से ज्यादा सीटों पर खास नजर, असम चुनाव को लेकर क्या है भाजपा की तैयारी?

Published: Mon, 06 Apr 2026 09:13 PM (IST)

असम चुनावों में बोडोलैंड की 15 सीटें भाजपा के लिए महत्वपूर्ण हैं। बीपीएफ के साथ गठबंधन के बाद, भाजपा को ...और पढ़ें

HighLights

  1. बोडोलैंड की 15 सीटें असम चुनाव में निर्णायक

  2. भाजपा के लिए मुस्लिम मतदाताओं का समर्थन महत्वपूर्ण चुनौती

  3. यूपीपीएल का अकेले चुनाव लड़ना, कांग्रेस का जनाधार कमजोर

नीलू रंजन, गुवाहाटी। चुनाव के छह महीने पहले सहयोगी बदलने वाली भाजपा के लिए बोडोलैंड अहम हो गया है जहां 15 सीटें हैं। बोडोलैंड क्षेत्रीय परिषद में मिली भारी सफलता के बाद भाजपा ने यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरेशन (यूपीपीएल) को छोड़कर बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) को राजग में शामिल करने के साथ ही मंत्रीमंडल में भी जगह दे दी थी।

लेकिन परिषद चुनाव में बीपीएफ को मिली भारी सफलता के पीछे भाजपा विरोधी मुस्लिम मतदाताओं की अहम भूमिका मानी जाती है।ऐसे में यदि मुस्लिम मतदाता राजग से बाहर होकर अकेले चुनाव लड़ रहे यूपीपीएल का साथ देती है तो भाजपा का दांव उलटा पड़ सकता है। वैसे भाजपा मुस्लिम वोटों में विभाजन की उम्मीद कर रही है। यहां बांग्लादेश से आए 'मियां' मुस्लिम के साथ ही असमिया या देशी मुसलमानों की संख्या भी ठीक-ठाक है, जिन्हें गोरिया मुस्लिम कहा जाता है।

ये 15 सीटें बेहद अहम 

मियां मुसलमानों के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले हिमंत बिस्व सरमा असमिया मुसलमानों को अपने पक्ष में करने की कोशिश में जुटे हैं। कोकराझाड़, बक्सा, चिरांग, उदालगुड़ी और तमुलपुर जिलों में फैले बोडोलैंड के अलग-अलग हिस्सों में 28 फीसद तक मुस्लिम मतदाता हैं। दरअसल असम 126 सदस्यीय विधानसभा में बोडोलैंड की 15 सीटें किसी भी पार्टी या गठबंधन के सत्ता में आने के लिए काफी अहम है।

2016 में बीपीएफ और 2021 में यूपीपीएल के साथ गठबंधन के सहारे बोडोलैंड में मिली भारी सफलता ने असम में भाजपा की सरकार बनाने में अहम भूमिका निभाई थी। भाजपा के लिए राहत की बात यह है कि बोडोलैंड में कांग्रेस का जनाधार बहुत कमजोर है और 2020 के कौंसिल और 2021 के विधानसभा चुनावों में बीपीएफ को मिली करारी हार के पीछे उसका कांग्रेस के साथ गठबंधन को जिम्मेदार माना जाता है।

कांग्रेस के लिए खाता खोलना मुश्किल

विधानसभा और लोकसभा चुनाव तो बहुत दूर की बात है कि क्षेत्रिय परिषद के चुनाव में भी कांग्रेस के लिए खाता खोलना मुश्किल होता है। बीपीएफ के साथ गठबंधन के बावजूद 2020 में कांग्रेस कौंसिल में सिर्फ एक सीट जीत पाई थी, जबकि 2025 में उसका खाता भी नहीं खुल सका।

यही कारण है कि इस बार राजग से बाहर होने के बावजूद यूपीपीएल ने कांग्रेस के गठबंधन में जाने के बजाय अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया। कोकराझाड़ में आम लोगों को भरोसा है कि बोडोलैंड में यूपीपीएल और बीपीएफ चाहे चाहे जो भी जीते, राजग में जा सकता है।