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एसआईआर का सच जनता के सामने लाएगी भाजपा, पूरे देश में चलाएगी जनजागरण अभियान

Published: Fri, 16 Oct 2026 08:38 PM (IST)

भाजपा एसआइआर पर कांग्रेस के झूठे नैरेटिव का खंडन करने के लिए देशव्यापी जनजागरण अभियान चलाएगी।

विपक्षी नैरेटिव के खिलाफ भाजपा का जनजागरण अभियान।

विपक्षी नैरेटिव के खिलाफ भाजपा का जनजागरण अभियान।

HighLights

  1. भाजपा एसआइआर पर देशव्यापी जनजागरण अभियान चलाएगी।

  2. कांग्रेस के झूठे आरोपों का पर्दाफाश करेगी पार्टी।

  3. एसआइआर की संवैधानिक वैधता और सच्चाई बताएगी।

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। एसआइआर पर पिछले कई महीने से कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दलों द्वारा फैलाए जा रहे नैरेटिव के खिलाफ भाजपा पूरे देश में जनजागरण अभियान चलाएगी। इसके तहत रैलियों, नुक्कड़ सभाओं, घर-घर जाकर जनसंपर्क से लेकर समाज के प्रबुद्ध जनों के बीच बुकलेट पहुंचाने की तैयारी चल रही है।

बुकलेट में एसआइआर पर कांग्रेस द्वारा उठाए गए सवालों का बिंदुवार जबाव देते हुए उसकी सच्चाई सामने रखी जाएगी। कहा गया कि यूं तो यह मुद्दा चुनाव आयोग का है लेकिन आयोग एक संवैधानिक संस्था है और वह राजनीतिक बयानबाजी में नहीं उलझती है। जबकि विपक्षी दलों की ओर से इसे राजनीतिक मुद्दा बनाया जा रहा है इसीलिए भाजपा सक्रियता से इसे बेनकाब करेगी।

एसआइआर के बारे में जनजागरण अभियान की जरूरत बताते हुए भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि कांग्रेस की ओर इसके बारे में लगातार झूठ बोला जा रहा है। 13 करोड़ वोट कटने से लेकर वोट चोरी का झूठ बार-बार बोलकर जनता को भ्रमित करने की कोशिश की गई है।

जाहिर है जनता तक सच्चाई पहुंचाना जरूरी है, ताकि वे सच्चाई का पता रहे। यानी एसआइआर की संवैधानिक वैधता, कब किस तरह हुआ एसआइआर, फार्म 6 के साथ घोषणापत्र क्यों। घोषणापत्र की मंशा और सुप्रीम कोर्ट की स्वीकृति आदि सबकुछ इसमें बताया जाएगा। इसीलिए पार्टी ने एक बड़ा अभियान शुरू करने का फैसला किया है। अभियान की विस्तृत रूपरेखा तैयार की जा रही है और जल्द इसे सार्वजनिक किया जाएगा।

वरिष्ठ नेता के अनुसार एसआइआर की प्रक्रिया लगभग 15 महीने से विभिन्न राज्यों में चल रहा है और सुप्रीम कोर्ट इसकी लगातार निगरानी कर रहा है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप में इसमें कई परिवर्तन भी किये गए हैं।

विभिन्न राज्यों और खासकर बिहार और पश्चिम बंगाल में एसआइआर की प्रक्रिया के दौरान कटे वोटों के मुद्दा भी सुप्रीम कोर्ट में उठ चुका है और अदालत इससे संतुष्टि भी जता चुका है।

इसी तरह से एसआइआर के दौरान 13 करोड़ लोगों के नाम मतदाता सूची से कटने की सच्चाई भी सबके सामने आ चुकी हैं, जिनमें मृतक, स्थायी रूप से दूसरे स्थान पर जाने वाले और कई जगहों पर मतदाता सूची में शामिल होने वालों के नाम है। उन्होंने कहा कि इन सारे तथ्यों और उनसे जुड़े सवालों का जवाब बुकलेट में होगा।