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'हताश नेता की झूठी गूंज', भाजपा ने CEC-SIR विवाद पर राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस का उड़ाया मजाक

Published: Thu, 24 Sep 2026 06:41 PM (IST)Updated: Thu, 24 Sep 2026 07:02 PM (IST)

राहुल गांधी की CEC ज्ञानेश कुमार पर प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद BJP ने उन पर निशाना साधा है। BJP नेता ...और पढ़ें

भाजपा ने राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर साधा निशाना

भाजपा ने राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर साधा निशाना

HighLights

  1. राहुल गांधी के CEC पर बयान को भाजपा ने बताया निराधार।

  2. सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल के राजनीतिक अनुभव पर उठाए सवाल।

  3. भाजपा ने राहुल के एंटी-इनकंबेंसी दावे को पूरी तरह खारिज किया।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। SIR और CEC ज्ञानेश कुमार पर राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर बीजेपी ने निशाना साधा है। राहुल की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद बीजेपी नेता सुधांशु त्रिवेदी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि राहुल गांधी ने कहा कहा कि मैं 50 साल से राजनीति समझ रहा हूं मगर उनकी खुद की उम्र 56 साल की है।

उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को भारतीय राजनीति का ज्ञान नहीं है। राहुल एंटी इनकंबेंसी की बात की, लेकिन वो नहीं जानते हैं कि बंगाल, बिहार और ओडिशा जैसे राज्यों में कई दशकों से कांग्रेस की वापसी नहीं हुई है।

उन्होंने कहा कि तकनीकी तौर पर रिप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपल एक्ट, 1950 का सेक्शन 21(3) चुनाव आयोग को यह अधिकार देता है कि वह अपनी आवश्यकता और व्यवस्था के अनुसार निर्णय ले सकता है। प्रक्रिया में मतभेद की बात बिल्कुल गलत है।

एंटी इनकंबेंसी वाले बयान पर साधा निशाना

सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल गांधी के आरोपों को एक हताश नेता की झूठी गूंज करार देते हुए कहा कि हार की बौखलाहट में कांग्रेस पार्टी अब लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने की नाकाम कोशिश कर रही है।

सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल गांधी के उस दावे को राजनीतिक अज्ञानता का प्रतीक बताया, जिसमें उन्होंने कहा था कि एंटी इनकंबेंसी एक स्थापित सच है और यह बीजेपी के आने के बाद बेअसर हुई है।

उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में 1967 के बाद से कांग्रेस कभी सत्ता में नहीं लौटी, जबकि उस दौर में बीजेपी का अस्तित्व भी नहीं था। पश्चिम बंगाल में 1977 के बाद कांग्रेस कभी सरकार नहीं बना सकी और वहां लगातार 34 वर्षों तक कम्युनिस्टों का शासन रहा।

सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि बिहार में 1990 के बाद से कांग्रेस गायब है और लालू यादव के नेतृत्व में लगातार तीन बार सरकार बनी। वहीं उत्तर प्रदेश में गांधी परिवार का गढ़ माने जाने वाले यूपी में भी 1989 के बाद से कांग्रेस की वापसी नहीं हो सकी है।

'कांग्रेंस के राज में चुनावी धांधली होती थी'

बीजेपी नेता सुधांशु त्रिवेदी कांग्रेस के अतीत पर हमला बोलते हुए कहा कि जिस दौर में कांग्रेस लंबे समय तक सत्ता में बनी रहती थी, उस समय वोटर आईडी कार्ड तक नहीं होते थे।

बूथ कैप्चरिंग, बैलेट बॉक्स की लूट और चुनावी हिंसा आम बात थी। यूपी और बिहार में चुनावों के दौरान जानें जाती थीं, लेकिन तब कांग्रेस के खिलाफ एंटी इनकंबेंसी काम नहीं करती थी।

आज जब चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी हो चुकी है, पैरामिलिट्री फोर्स की तैनाती होती है, सीसीटीवी और लाइव स्ट्रीमिंग से निगरानी होती है और मीडिया व न्यायपालिका पूरी तरह स्वतंत्र हैं, तब पारदर्शी व्यवस्था के कारण कांग्रेस के लिए सत्ता में लौटना नामुमकिन हो गया है। इसी हताशा में राहुल गांधी झूठा नैरेटिव गढ़ रहे हैं।

रिपोर्ट को लेकर क्या कहा?

अंग्रेजी अखबार में छपी रिपोर्ट का हवाला देने पर सुधांशु त्रिवेदी ने सवाल उठाया कि क्या उस रिपोर्ट में किसी भी चुनाव आयुक्त का कोई आधिकारिक या ऑफ-द-रिकॉर्ड बयान दर्ज है? जवाब है—बिल्कुल नहीं।

क्या चुनाव आयोग के फैसले सर्वसम्मति से नहीं हुए या कोई ऐसी प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई जिसमें तीनों आयुक्त साथ न हों?

उन्होंने कहा कि अगर बिना किसी बयान वाली मीडिया रिपोर्टों को ही सच मानना है, तो इसी अखबार ने अप्रैल 2012 में लिखा था कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार इतनी डरी हुई थी कि सेना को लेकर भी आशंकाएं जताई जाने लगी थीं। क्या राहुल गांधी उस रिपोर्ट पर भी यकीन करेंगे?

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