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भाजपा ने विपक्ष पर लगाया झूठा नैरेटिव गढ़ने का आरोप, बंगाल के आंकड़ों के जरिए दिखाया आईना

Published: Wed, 23 Sep 2026 10:18 PM (IST)

भाजपा ने चुनाव आयोग पर विपक्ष के झूठे नैरेटिव गढ़ने के आरोप को खारिज किया है। पार्टी प्रवक्ता संबित पात्रा ...और पढ़ें

भाजपा ने विपक्ष पर लगाया झूठा नैरेटिव गढ़ने का आरोप।

भाजपा ने विपक्ष पर लगाया झूठा नैरेटिव गढ़ने का आरोप।

HighLights

  1. भाजपा ने चुनाव आयोग पर विपक्ष के आरोपों को झूठा बताया।

  2. संबित पात्रा ने पश्चिम बंगाल के चुनाव आंकड़े प्रस्तुत किए।

  3. कांग्रेस के शासनकाल में चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति पर सवाल उठाए।

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। चुनाव आयोग को लेकर जहां विपक्ष हमलावर है, वहीं भाजपा ने मतभिन्नता को लोकतांत्रिक बताते हुए विपक्ष पर झूठा नैरेटिव गढ़ने का आरोप लगाया है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि पश्चिम बंगाल में जिन 20 विधानसभा सीटों पर सबसे ज्यादा वोट एसआइआर में कटे हैं, उनमें से 13 तृणमूल कांग्रेस, एक कांग्रेस और केवल छह भाजपा जीती है।

भाजपा ने मुख्य चुनाव आयुक्त और सरकार की मिलीभगत के आरोपों का करारा जवाब देते हुए कहा कि "कांग्रेस के शासनकाल में चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति और राजनीतिक नजदीकियों को लेकर उठे पुराने सवालों का जवाब कौन देगा?"

चुनाव आयुक्तों के बीच 14 बार आधिकारिक विचार-विमर्श को स्वस्थ लोकतांत्रिक चर्चा बताते हुए संबित पात्रा ने कहा कि विचार-विमर्श से सर्वसम्मति बनाने की प्रक्रिया से विपक्ष की परेशानी समझ से परे है। उन्होंने कहा कि किसी मुद्दे पर मत भिन्नता होना स्वाभाविक है और ऐसा सभी लोकतांत्रिक संस्थाओं में होता है। लेकिन इसके सहारे विपक्ष वोट चोरी का झूठा नैरेटिव गढ़ने की कोशिश कर रहा है।

उन्होंने पश्चिम बंगाल का उदाहरण देते हुए कहा कि अगर वोटर लिस्ट से नाम कटने का फायदा भाजपा को मिलता है, तो सबसे ज्यादा नाम कटने वाली सीटों पर टीएमसी की जीत कैसे हो गई। विपक्ष के पास इसका क्या जवाब है? उन्होंने कहा कि 2014 से 2024 के बीच भाजपा कई चुनाव जीती है तो कई में उसे हार का सामना भी करना पड़ा है। और तब ज्ञानेश कुमार मुख्य चुनाव आयुक्त भी नहीं थे।

संबित पात्रा ने कांग्रेस पर उठाए सवाल

संबित ने कहा कि सच्चाई यह है कि नवीन चावला की नियुक्ति और कांग्रेस के प्रति झुकाव को लेकर तत्कालीन मुख्य चुनाव आयुक्त एन.गोपालस्वामी ने ही सवाल उठाए थे। यही नहीं, उस समय अखबारों में ‘सोनिया गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त नियुक्त किया’ जैसी सुर्खियां छपती थीं।

उन्होंने कांग्रेस को यह बताने को कहा कि उस समय सोनिया गांधी के पास ऐसा कौन-सा संवैधानिक पद था, जिसके आधार पर वे मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति कर सकती थीं। लोकतंत्र में अंतिम फैसला जनता के पास होने की बात करते हुए पात्रा ने कहा कि अगर विपक्ष को चुनाव आयोग, एसआईआर और ईवीएम पर भरोसा नहीं है, तो आखिर भरोसा किस पर है।

सच्चाई यह है कि जनता बार-बार भाजपा पर भरोसा जताती रही है। उन्होंने एक्जिट पोल के अनुमानों के लिए भी ईवीएम को दोषी ठहराने के विपक्ष के रवैये पर तीखा कटाक्ष किया।