पटना, [जाब्यू]। राजनीति में यही होता है। साढ़े सात साल तक सायरन बजाते एस्कॉर्ट में चलने वाले सुशील कुमार मोदी सोमवार को खुली पिकअप वैन [मध्य वर्ग की खुली गाड़ी] पर थे। चौबीस घंटे पहले तक की अपनी ही सरकार के खिलाफ। नब्बे के दौर वाले मोदी। बिल्कुल पुरानी रौ में। वे अपनों के साथ पटना के लोगों को वह सब कुछ खुले तौर पर बता रहे थे, जो भाजपाइयों की जुबान से जदयू के खिलाफ लगातार बरस रहा है। सबको समझा रहे थे कि कैसे जदयू विश्वासघाती है और मंगलवार का बिहार बंद इसी के विरोध में है।

लोग भौचक थे। मोदी व उनके लोगों का यह स्वरूप राजनीति में दोस्ती, दुश्मनी की कहानी अपने-आप कह रहा था। मोदी के साथ वैन पर नंदकिशोर यादव, विधायक अरुण कुमार सिन्हा, नितिन नवीन आदि थे। चेहरे पर मुस्कान थी, पब्लिक को देख हाथ की मुद्राएं बदल रही थीं। कभी प्रणाम की मुद्रा, तो कभी आह्वान की। आग्रह यही कि बिहार बंद को कामयाब बनाकर मुनादी कीजिए कि बिहार, अपने जनादेश के साथ विश्वासघात को बर्दाश्त नहीं करेगा। ध्यान रहे कि जदयू के साथ छोड़ने के विरोध में भाजपा विश्वासघात दिवस मना रही है और इसीलिए मंगलवार को बिहार बंद है।

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