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'याद रखना चाहिए कि भारत कोई बनाना रिपब्लिक नहीं है', भाजपा ने एलन मस्क को लिया आड़े हाथ

Published: Sat, 10 Oct 2026 09:46 AM (IST)

एलन मस्क के भारत सरकार पर आरोपों और राहुल गांधी से उनकी सोशल मीडिया बातचीत पर भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया ...और पढ़ें

भाजपा नेता ने एलन मस्क को घेरा।

भाजपा नेता ने एलन मस्क को घेरा।

HighLights

  1. भाजपा ने एलन मस्क के आरोपों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी।

  2. राहुल गांधी पर विदेशी ताकतों से सांठगांठ का आरोप लगाया।

  3. राम माधव ने मस्क को 'बनाना रिपब्लिक' टिप्पणी पर चेताया।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। टेस्ला के मालिक एलन मस्क की तरफ से बीते दिनों भारत सरकार पर लगाए गंभीर आरोप और फिर राहुल गांधी के साथ सोशल मीडिया पर बातचीत के मामले ने देशभर में सियासत तेज कर दिया है। ऐसे में अब भाजपा ने इस मामले में मस्क और राहुल गांधी दोनों को एक साथ आड़े हाथ लिया है।

बता दें कि भाजपा ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और मस्क बीच सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर हुई दोस्ताना बातचीत को निशाना बनाया। भाजपा ने इसे राष्ट्रीय हितों के खिलाफ विदेशी ताकतों के साथ सांठगांठ करार दिया है।

मस्क को भाजप की दो टूक

भाजपा नेता राम माधव ने एलन मस्क को चेतावनी देते हुए कहा कि उन्हें यह नहीं भूलना चाहिए कि वह किसी बनाना रिपब्लिक से डील नहीं कर रहे हैं। राम माधव ने कहा कि वह एक ऐसे विशाल और सम्मानित देश से डील कर रहे हैं, जिसके नेतृत्व का पूरी दुनिया में सम्मान होता है।

राम माधव ने आगे कहा कि मस्क को इस देश और इसके नेतृत्व के प्रति सम्मान दिखाना चाहिए। यह मोदी सरकार है, यहां सब कुछ पूरी पारदर्शिता और बिना किसी भेदभाव के होगा। इस दौरान भाजपा नेता ने पिछली यूपीए सरकार के दौरान स्पेक्ट्रम आवंटन में हुए भ्रष्टाचार के पुराने मामलों की भी याद दिलाई।

विदेशी ताकतों से मदद मांगने का आरोप

दूसरी ओर राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए भाजपा नेत्री स्मृति ईरानी ने कहा कि यह पहली बार नहीं है जब कांग्रेस नेताओं ने भारत की चुनी हुई लोकतांत्रिक सरकार के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय समर्थन मांगने की कोशिश की है।

उधर, पूर्व केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने राहुल गांधी को 'राजनीतिक अवसरवाद का प्रतीक' बताया। उन्होंने कहा कि जिस स्टारलिंक कंपनी और मस्क का कांग्रेस ने कभी राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर कड़ा विरोध किया था, आज उसी पर उनका रुख कैसे बदल गया? राजनीतिक स्वार्थ के लिए सिद्धांतों को ताक पर नहीं रखा जा सकता।