मतदाता सूची विवाद: भाजपा ने कांग्रेस पर साधा निशाना, फर्जी वोटर के आरोपों पर घेरा
भाजपा ने कांग्रेस पर 'आरोप लगाकर भागने' की राजनीति करने का आरोप लगाया, खासकर मतदाता सूची में फर्जी मतदाताओं के दावे पर।

मतदाता सूची देने संबंधी आरोपों पर भाजपा ने कांग्रेस को घेरा।
HighLights
भाजपा ने कांग्रेस की 'आरोप लगाकर भागने' की राजनीति की निंदा की।
राहुल गांधी के फर्जी वोटर आरोपों पर शिकायत न करने का सवाल उठाया।
कांग्रेस ने चुनाव आयोग पर पठनीय मतदाता सूची देने में देरी का आरोप लगाया।
जागरण न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली। भाजपा ने कांग्रेस की आलोचना करते हुए उससे ‘आरोप लगाकर भागने’ की राजनीति बंद करने को कहा। मुख्य विपक्षी दल ने दावा किया था कि चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों को ‘पठनीय’ मतदाता सूचियां देने का फैसला इसलिए किया है, क्योंकि पूरा देश ‘वोट चोरों’ के खिलाफ सड़कों पर उतर आया है।
पीटीआई के अनुसार, भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने रविवार को कहा कि राहुल गांधी ने पिछले साल कर्नाटक के महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्र में ‘एक लाख फर्जी मतदाताओं’ के नाम दर्ज होने के अपने आरोप पर अब तक न तो औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है और न ही हलफनामा दिया है। गांधी ने यह आरोप खोजने योग्य मतदाता सूचियों की मांग करते हुए लगाया था।
जवाबी हमला करते हुए भाजपा प्रवक्ता भंडारी ने एक्स पर एक पोस्ट में कांग्रेस से ‘आरोप लगाकर भागने’ की राजनीति बंद करने को कहा। भंडारी ने कहा कि राहुल गांधी ने पिछले साल खोजने योग्य मतदाता सूची की मांग करते हुए कर्नाटक के महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्र में ‘एक लाख फर्जी मतदाताओं’ के नाम दर्ज होने का आरोप लगाया था, लेकिन इस संबंध में अब तक न तो औपचारिक शिकायत दी है और न ही हलफनामा सौंपा है।
जयराम रमेश के बयान पर BJP का जवाब
कांग्रेस नेता जयराम रमेश के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा प्रवक्ता भंडारी ने कहा,“जयराम रमेश, आपकी पोस्ट से स्पष्ट है कि सुप्रीम कोर्ट में अपने मामले को लेकर आपका आत्मविश्वास कम है।” ध्यान रहे 12 अक्टूबर को राहुल गांधी और अन्य विपक्षी दलों के नेताओं ने मतदाता सूचियों के एसआईआर में बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाने के आरोपों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।
ब्यूरो के अनुसार, कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया, “चुनाव आयोग ने बार-बार इस मांग को ठुकराया। 2018 में जब कांग्रेस को मध्य प्रदेश में लाखों फर्जी मतदाता मिले, तब आयोग ने खोजने योग्य मतदाता सूचियां देना बंद कर दिया था। वोट चोरी संभव बनाने के लिए आठ साल तक यह मांग ठुकराई।”
रमेश ने कहा कि चुनाव आयोग ने 15 अक्टूबर को आदेश जारी किया कि दो साल के अंतराल के बाद 17 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में फिर शुरू हुए एसएसआर के लिए राजनीतिक दलों को मतदाता सूचियां खोजने योग्य प्रारूप में दी जाएंगी। रमेश ने कहा, “मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद छोड़ना होगा। चुनाव आयोग और उसकी आईटी प्रणाली में पूरी तरह बदलाव करना होगा।”
