नई दिल्ली। श्रीलंकाई तमिलों के मुद्दे पर यूपीए सरकार से समर्थन वापसी की घोषणा के बाद डीएमके पर जहां कई दलों के नेताओं ने हमला बोला है, वहीं मुख्य विपक्षी भाजपा ने सरकार से तुरंत इस्तीफे की मांग की है।

तमिलनाडु की मुख्यमंत्री और एआईडीएमके प्रमुख जे जयललिता ने करुणानिधि पर हमला करते हुए कहा कि वह लोगों को बेवकूफ बनाना बंद करें। उन्होंने कहा कि संसद में प्रस्ताव से तमिलों का भला होने वाला नहीं है। तमिल मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र संघ में श्रीलंका के खिलाफ कड़ा प्रस्ताव आना चाहिए। जयललिता ने कहा कि करुणानिधि इस मसले पर केवल राजनीतिक ड्रामा कर रहे हैं। अब तक वह इस मुद्दे पर चुप क्यों थे।

उधर, सरकार को बाहर से समर्थन दे रही समाजवादी पार्टी के महासचिव राम गोपाल यादव ने कहा कि डीएमके सौदेबाजी कर रही है। वह सरकार को किसी भी तरह से अस्थिर करना चाहती है। उन्होंने कहा कि यूपीए सरकार को कोई खतरा नहीं और सपा सरकार को अपना समर्थन जारी रखेगी। वहीं सरकार की एक अन्य सहयोगी बहुजन समाज पार्टी सुप्रीमो मायावती ने कहा कि डीएमके के समर्थन वापसी से सरकार की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि फिरकापरस्त ताकतों को सत्ता से बाहर रखने लिए उनकी पार्टी यूपीए सरकार को समर्थन देती रहेगी।

इस बीच, मुख्य विपक्षी पार्टी भाजपा के उपाध्यक्ष मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा है कि सरकार का सत्ता में बने रहना देशहित में नहीं है। पार्टी आम चुनाव के लिए पूरी तरह से तैयार है। नकवी ने कहा कि यह सरकार वेंटीलेंटर पर है और वह भाग-दौड़ कर किसी तरह से सत्ता में बने रहना चाहती है। श्रीलंकाई तमिलों के मसले पर संसद में प्रस्ताव पेश करने को लेकर नकवी ने कहा कि यह कांग्रेस की समस्या है कि वह इसे कैसे मैनेज करती है। लेकिन यह स्थिति किसी भी तरह से देशहित में नहीं है।

उधर, वामपंथी दल सीपीएम ने कहा है कि डीएमके सरकार से सौदेबाजी कर रही है। उसकी न तो नीति स्पष्ट है और न ही नीयत।

इधर, यूपीए सरकार में मंत्री व कांग्रेस नेता कमलनाथ ने कहा कि सरकार श्रीलंका के मुद्दे पर संसद में प्रस्ताव लाने को तैयार है। इसके लिए सभी दलों से बातचीत की जाएगी।

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