जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। दुनिया की सबसे ताकतवर सेनाओं में एक भारतीय सेना के नए प्रमुख के रुप में जनरल बिपिन रावत ने कमान संभाल ली। वहीं कारगिल युद्ध में मिग लड़ाकू विमानों से हिस्सा लेने वाले एयर चीफ मार्शल बीरेंद्र सिंह धनोआ ने भारत के नए वायुसेना प्रमुख का कामकाज संभाल लिया।

इस तरह नए साल की पूर्व संध्या पर सेना और वायुसेना दोनों को आगे की चुनौतियों में कमान संभालने वाला नेतृत्व मिल गया। नए सेना प्रमुख के रुप में कमान संभालने वाले जनरल बीपी रावत के लिए पहले दिन की शुरूआत भी अच्छी रही जब पूर्वी कमान के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल प्रवीण बक्शी ने वरिष्ठता के विवाद को पीछे छोड़ते हुए नए सेना प्रमुख को पूरा समर्थन देने की घोषणा कर दी।

इतना ही नहीं लेफ्टिनेंट जनरल बक्शी ने फोन कर जनरल बीपी रावत को बधाई देकर अपनी वरिष्ठता की अनदेखी से नाराज होकर इस्तीफा देने की अटकलों को भी विराम दे दिया। गौरतलब है कि जनरल रावत को उनसे दो वरिष्ठ लेफ्टिनेंट जनरल बक्शी और पीएम हारिज के मुकाबले तवज्जो देकर सरकार ने नया सेना प्रमुख नियुक्त किया था। जाहिर तौर पर बक्शी का नए सेना प्रमुख के साथ पूरी तरह सहयोग का बयान सरकार और सेना दोनों के लिए राहत है।जनरल रावत ने साउथ ब्लॉक में जनरल दलबीर सिंह सुहाग से सेना प्रमुख के कक्ष में परंपरागत बेटन हासिल कर देश के 27 वें सेना प्रमुख के तौर पर कमान संभाल ली।

जनरल रावत को कश्मीर, चीन से लगी पूर्वी सीमा के इंफैट्री डिजिवन की कमान संभालने से लेकर संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन में नेतृत्व करने का व्यापक अनुभव है। अब तक सेना के उप प्रमुख रहे रावत डीजीएमओ सहित सेना के कई अहम पदों पर रह चुके हैं। इन्हीं अनुभवों के चलते सरकार ने सेना प्रमुख के रुप में नियुक्ति में उन्हें तवज्जो दी। ग्यारहवें गोरखा राइफल्स की 5वीं बटालियन में 1978 में सेना में कमीशन हासिल करने वाले रावत ने राष्ट्रीय मिलिट्री स्कूल देहरादून ने सैन्य अफसर के रुप में अपना मुकाम शुरू किया। चीन और पाकिस्तान के साथ लगातार सीमा पर होने वाले तनाव और उतार-चढ़ाव के दौर के बीच जाहिर तौर पर उनकी सेना प्रमुख के रुप में चुनौती कहीं ज्यादा होगी।

सेना प्रमुख के पद से रिटायर हुए जनरल दलबीर सिंह सुहाग ने हालांकि यह कहते हुए रावत को आश्र्वस्त किया कि हमारी सेना दुनिया में किसी भी तरह की चुनौती का सामना करने के लिए न केवल सक्षम है बल्कि हमेशा तैयार भी है।वहीं देश के 25 वें वायुसेना प्रमुख के रुप में कमान संभालने के बाद एयर मार्शल बीपी धनोआ ने कहा कि दुनिया की सबसे बेहतरीन वायुसेना में एक भारतीय वायुसेना का नेतृत्व करना उनके लिए सम्मान की बात है। उन्होंने कहा कि वायुसेना अभी आधुनिकीकरण के दौर से गुजर रही है और आने वाले समय में जेट लड़ाकू विमानों से लेकर एयर डिफेंस रडार तक की ताकत में इजाफा होगा।

एयर मार्शल अरूप राहा के रिटायर होने के बाद शनिवार को धनोआ ने वायुसेना भवन में परंपरागत गार्ड ऑफ आनर के साथ नए प्रमुख के रुप में कामकाज शुरू किया। लड़ाकू विमान के पायलट के रुप में 1978 में शामिल हुए धनोआ ने कारगिल युद्ध के दौरान कमांडिग आफिसर के रुप में मिग-21 विमान के साथ इसमें शिरकत की थी। वह पिछले डेढ साल से वायुसेना के उप प्रमुख थे और इससे पहले कई अहम पदों पर रह चुके हैं।

सेना प्रमुखों की कमिटी के प्रमुख बने लांबा

सेना और वायुसेना के दो नए प्रमुखों के साथ बुधवार को नौसेना प्रमुख एडमिरल सुनील लांबा ने तीनों सेनाओं के प्रमुखों की कमिटी के अध्यक्ष का कामकाज संभाल लिया। चेयरमैन चीफ आफ डिफेंस कमिटी का पद तीनों सेनाओं के प्रमुखों में सबसे वरिष्ठ को सौंपा जाता है। वायुसेना प्रमुख के रुप में रिटायर हुए एयर मार्शल अरूप राहा से लांबा ने यह पद ग्रहण किया है।

इस मौके पर साउथ ब्लॉक स्थिति लॉन में जनरल दलबीर सिंह ने अपने कार्यकाल के आखिरी समय में गार्ड ऑफ ऑनर लिया।

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वहीं वायुसेना अध्यक्ष अरूप राहा भी शनिवार को अपने पद से रिटायर हो गए। उनकी जगह बी.एस धनोवा नए वायुसेना अध्यक्ष का पदभार संभालेंगे। अरूप राहा अपने कार्यकाल का आखिरी गार्ड ऑफ ऑनर लिया।

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