नई दिल्ली, प्रेट्र।  हैदराबाद की दवा कंपनी बायोलाजिकल ई अपनी स्वदेशी कोरोना वैक्सीन कार्बेवैक्स का अंतिम डाटा नवंबर के अंत तक सौंप सकती है। आधिकारिक सूत्रों ने गुरुवार को यह जानकारी दी। भारत के औषधि महानियंत्रक (DGCI) द्वारा दो से 18 वर्ष आयु वर्ग के लिए भारत बायोटेक की कोवैक्सिन के लिए आपातकालीन उपयोग की मंजूरी पर, सूत्र ने कहा कि यह विशेषज्ञ की राय और मूल्यांकन के अधीन है।

सेंट्रल ड्रग अथारिटी की कोरोना पर विषय विशेषज्ञ समिति (एसईसी) ने मंगलवार को कुछ शर्तो के साथ दो से 18 साल के बच्चों और किशोरों के लिए कोवैक्सीन को आपातकालीन उपयोग प्राधिकरण देने की सिफारिश की। सूत्र ने कहा कि विदेश से कच्चा माल मिलने में देरी के कारण, बायोलाजिकल ई के टीके में देरी हुई, लेकिन कंपनी नवंबर के अंत तक अपनी कोरोना वैक्सीन कार्बेवैक्स का डाटा जमा कर सकती है।

भारत की सब्जेक्ट एक्सपर्ट कमेटी (एसईसी) ने कोवैक्सीन को 2-18 वर्ष के बच्चों के लिए इमरजेंसी के तौर पर इस्‍तेमाल करने की इजाजत दे दी है। बता दें कि एसईसी ने इसकी मंजूरी भारत बायोटेक द्वारा किए गए दूसरे व तीसरे चरण के ट्रायल का डाटा के आधार पर दी है। हालांकि इसको अभी DGCI की स्वीकृति मिलना बाकी है। इसके बाद ही इसको राष्ट्रीय टीकाकरण अभियान में शामिल किया जा सकेगा।

वर्तमान में स्वदेशी रूप से विकसित कार्बेवैक्स, एक आरबीडी प्रोटीन सब-यूनिट वैक्सीन है। इस वैक्सीन के दूसरे तीसरे चरण के परीक्षण, 18 वर्ष से 80 वर्ष की आयु के वयस्कों में चल रहे हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने जून में घोषणा की थी, बायोलाजिकल ई दिसंबर तक केंद्र सरकार को कार्बेवैक्स की 30 करोड़ डोज की आपूर्ति करेगी। एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि मंत्रालय ने 30 करोड़ वैक्सीन खुराक आरक्षित करने के लिए कंपनी के साथ सभी प्रबंध कर लिए हैं। बायोलाजिकल ई की कोरोना वैक्सीन बायोटेक्नोलाजी विभाग और इसके सरकारी उपक्रम बायोटेक्नोलाजी इंडस्ट्री रिसर्च असिस्टेंस काउंसिल के सहयोग से विकसित की गई है।

Edited By: Monika Minal