जयप्रकाश रंजन, बेनोलिम (गोवा)। यह तो सार्क देशों के सम्मेलन के रद्द होने के साथ ही तय हो गया था कि आतंकवादियों को पनाह देने और उन्हें हरसंभव मदद करने में जुटा पाकिस्तान दक्षिण एशियाई देशों में बिल्कुल अलग थलग हो गया है। लेकिन सोमवार को बिम्सटेक देशों ने यह साफ कर दिया कि इस पूरे इलाके में पाकिस्तान के साथ खड़ा होने वाला कोई नहीं है। बांग्लादेश, म्यांमार, थाईलैंड, भूटान, श्रीलंका, नेपाल और भारत को मिला कर बने इस संगठन की तरफ से जारी घोषणा पत्र में पाकिस्तान और उसके आतंक प्रेम पर करारा प्रहार किया गया है। आतंक के मुद्दे पर ईरान और अफगानिस्तान के साथ पाकिस्तान के रिश्ते पहले से ही खऱाब हो चुके हैं।

बिम्सटेक देशों की तरफ से जारी घोषणापत्र किसी अंतरराष्ट्रीय संगठन की तरफ से पाकिस्तान की तरफ इशारा करते हुए अभी तक का सबसे कठोरतम ऐलान है। इसमें आतंक पर भारतीय पीएम नरेंद्र मोदी की तरफ से हाल के दिनों में जताई गई चिंताओं पर मुहर लगाया गया है। इसमें कहा गया है कि 'इस पूरे क्षेत्र की शांति व स्थिरता को आतंकवाद की वजह से ही सबसे बड़ा खतरा पैदा हुआ है। हम हाल के दिनों में इस क्षेत्र में हुई खौफनाक आतंकी घटनाओं की जोरदार शब्दों में निंदा करते हैं। हम समझते हैं कि सिर्फ आतंकियों और उनके संगठनों के खिलाफ कार्रवाई ही नहीं होनी चाहिए बल्कि इन्हें बढ़ावा देने वाले, पनाह देने वाले और इन्हें वित्तीय मदद देने वाले और इनकी गतिविधियों का गुणगान करने वाले देशों के खिलाफ भी कठोरतम कार्रवाई होनी चाहिए।' इसके बाद हिजबुल आतंकी बुरहान बानी को शहीद बताने में जुटे पाकिस्तानी पीएम नवाज शरीफ की तरफ इशारा करते हुए कहा गया है कि किसी भी आतंकी को शहीद नहीं बताया जाना चाहिए।

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पाकिस्तान के लिए बिम्सटेक के इस बेहद कड़े संदेश का अपना महत्व है। एक तो इसमें सार्क के तमाम देश शामिल हैं। साथ ही म्यंमार और थाईलैंड जैसे देश भी शामिल हैं जो सीधे तौर पर पाक परस्त आतंक से प्रभावित नहीं है लेकिन वह अब यह मान रहे हैं कि अगर आतंक से इस क्षेत्र का सबसे बड़ा देश भारत पर असर पड़ेगा तो वे भी शांति से नहीं रह सकेंगे। वैसे पाकिस्तान के पीएम नवाज शरीफ के विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अजीज ने आज जिस तरह से बयान दिये हैं उससे लगता नहीं है कि पाकिस्तानी हुक्मरान अभी भी कोई सबक सीखने को तैयार हैं।

बिम्सेट देशों की घोषणा पत्र में पहली बार भविष्य का एक व्यापक आर्थिक एजेंडा भी पेश किया गया है। सभी देश इस बात के लिए रजामदं है कि मुक्त व्यापार क्षेत्र (एफटीए) स्थापित करने के सुझाव को अब ज्यादा दिनों तक लटकाया नही जाना चाहिए। इस बारे में सदस्य देशों ने गठित समितियो को आवश्यक निर्देश दे दिया है कि जल्द से जल्द एफटीए का एजेंडा तैयार किया जाए। सेवा और निवेश क्षेत्र में भी जल्द से जल्द समझौता करने का निर्देश दिया गया है। लेकिन समझौते में इस बात का ख्याल रखा जाएगा कि संगठन के सबसे गरीब देशों के हितों का ख्याल रखा जाएगा कि उन्हें एफटीए से कोई परेशानी न हो।

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Posted By: Rajesh Kumar

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