मुंबई [ओमप्रकाश तिवारी़]। मंगलवार को स्वयं आत्महत्या जैसा कदम उठाने वाले संत भय्यूजी महाराज करीब एक दशक पहले विदर्भ के किसानों को आत्महत्या से बचाने के लिए लंबा अभियान चला चुके थे।

2008 में विलासराव देशमुख के मुख्यमंत्रित्व काल में महाराष्ट्र में अकाल से जूझ रहे किसानों की आत्महत्याएं बहुत बढ़ गई थीं। सरकार को भी कोई उपाय नहीं सूझ रहा था। तब भय्यू महाराज ने विदर्भ के छह जिलों में 60 दिन की एक यात्रा निकालकर किसानों को जागरूक करने का कार्यक्रम चलाया था। इसके लिए उन्होंने कई टीमों का गठन किया था। प्रत्येक टीम में वकील, मनोवैज्ञानिक, आध्यात्मिक प्रवचनकार शामिल थे। ये टीमें जिस-जिस गांव में जाती थीं, वहां उस क्षेत्र के पुलिस अधिकारियों एवं कृषि अधिकारियों का भी सहयोग हासिल रहता था।
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इस अभियान से जुड़े उनके एक सहोयगी अरविंद तिवारी बताते हैं कि उनके इस अभियान का किसानों पर अच्छा असर भी हुआ था। करीब दो दशक पहले से महाराष्ट्र के प्रसिद्ध तीर्थ स्थलों पर उनकी संस्था प्रेरक एवं शिक्षाप्रद फिल्में दिखाकर किसानों का मार्गदर्शन किया करती थी। किसानों को मुफ्त खाद एवं बीच वितरण भी वह करवाते थे। वृक्षारोपण के क्षेत्र में भी उनका बड़ा योगदान रहा है।

इसके अलावा महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले स्थित खामगांव कस्बे में वह अत्यंत पिछड़े समझे जानेवाले पारधी समाज के बच्चों के लिए निशुल्क आवासीय विद्यालय चला रहे हैं। इस विद्यालय में शहीद सैनिकों के बच्चों को भी शिक्षा दी जाती है।

 

Edited By: Vikas Jangra

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