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डीजल नहीं अब गंगा में उतरेगी बैटरी चालित यात्री वेसल, गार्डनरीच में शुरू हुआ निर्माण कार्य

Published: Sat, 29 Aug 2026 07:53 PM (IST)Updated: Sat, 29 Aug 2026 08:01 PM (IST)

पश्चिम बंगाल सरकार ने गंगा में बैटरी चालित यात्री वेसल के निर्माण का अनुबंध गार्डनरीच शिपबिल्डर्स को सौंपा है। यह ...और पढ़ें

एआई से बनाई गई सांकेतिक तस्वीर।

एआई से बनाई गई सांकेतिक तस्वीर।

HighLights

  1. गार्डनरीच शिपबिल्डर्स को बैटरी चालित यात्री वेसल निर्माण का अनुबंध।

  2. गंगा में दो पर्यावरण अनुकूल वेसल 15 महीनों में चलेंगे।

  3. प्रत्येक वेसल 100 यात्रियों को ले जाने में सक्षम होगा।

राज्य ब्यूरो, कोलकाता। पर्यटकों और आम यात्रियों के लिए बंगाल सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। देश की पहली बैटरी चालित यात्री वेसल (जहाज के निर्माण के लिए गार्डनरीच शिपबिल्डर्स को आधिकारिक तौर पर अनुबंध सौंप दिया गया है। इसके तहत राज्य के लिए फिलहाल दो अत्याधुनिक जहाज यानी स्टीमर का निर्माण किया जाएगा।

शनिवार को आयोजित एक विशेष समारोह में इस टेंडर को अंतिम रूप दिया गया। इस दौरान राज्य के पर्यटन मंत्री शंकर घोष, शिपबिल्डर्स के अधिकारी पीआर हरि, मंत्री पूर्णिमा चक्रवर्ती और वरुण राय समेत कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। अधिकारियों के अनुसार, यह जहाज पूरी तरह से पर्यावरण अनुकूल (इको-फ्रेंडली) होगी।

गंगा जलमार्ग के लिए उठाए जा रहे कई कदम

केंद्र और राज्य के सहयोगात्मक प्रयासों से गंगा के जलमार्ग को परिवहन व्यवस्था के रूप में पुनर्जीवित करने के लिए कई अहम कदम उठाए जा रहे हैं। परिवहन मंत्री अर्जुन सिंह ने घोषणा की है कि गंगा में जल्द ही वाटर टैक्सी और वाटर मेट्रो का संचालन शुरू किया जाएगा। यात्री सुविधा और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए बैटरी चालित जहाज का यह खाका तैयार किया गया है।

वर्तमान में गंगा में पारंपरिक लांच और डीजल से चलने वाली नावें चलती हैं, लेकिन इस आधुनिक पहल के बाद अब सवाल उठने लगा है कि क्या पारंपरिक डीजल मोटर चलाती नौकाओं का दौर समाप्त होने वाला है?

एक जहाज की कीमत कितनी?

प्राप्त जानकारी के अनुसार, एक जहाज के निर्माण में लगभग 21 करोड़ रुपये की लागत आएगी, जिससे दोनों जहाजों के लिए कुल 42 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। मंत्री शंकर घोष ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि हम केंद्र और राज्य के संयुक्त प्रयासों से उन अटके हुए कार्यों को पूरा करना चाहते हैं जो अब तक अधूरे थे।

मंत्री ने आगे कहा कि आज का दिन ऐतिहासिक है क्योंकि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में हरित और पर्यावरण-अनुकूल परिवहन पर विशेष जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने भी इच्छा जताई है कि इस वाटर वे ट्रांसपोर्ट का उपयोग बेलूर और दक्षिणेश्वर जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों तक पहुंचने के लिए किया जाए।

एक जहाज की कितनी क्षमता?

प्रत्येक जहाज की क्षमता एक साथ 100 यात्रियों को ले जाने की होगी। तय योजना के मुताबिक, आगामी 15 महीनों के भीतर ये दोनों जलयान गंगा की लहरों पर उतर जाएंगे। इस बीच, उत्तर बंगाल के जलपाइगुड़ी के जलदापाड़ा में टूटे दो बेली ब्रिजों के पुनर्निर्माण का जिम्मा भी गार्डनरीच शिपबिल्डर्स को सौंपा गया है।

ब्रिज निर्माण और जलयान खरीद को मिलाकर कुल 45 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे, जिसका वित्तपोषण केंद्र सरकार की 'सस्की' (एसएएससीआइ) योजना के तहत किया जाएगा। सरकार का मुख्य लक्ष्य पर्यटकों को निर्बाध और पर्यावरण-अनुकूल परिवहन सुविधाएं प्रदान करना है।