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बीएड पास प्राइमरी शिक्षकों की नौकरी अब सुरक्षित, 6 महीने का ब्रिज कोर्स शुरू

Published: Thu, 17 Sep 2026 09:32 PM (IST)

केंद्र सरकार ने प्राइमरी स्कूलों में पढ़ा रहे बीएड शिक्षकों की नौकरी सुरक्षित करने के लिए छह महीने का विशेष ...और पढ़ें

बीएड शिक्षकों के लिए 6 महीने का ब्रिज कोर्स शुरू (यह तस्वीर AI द्वारा जनरेट की गई है।)

बीएड शिक्षकों के लिए 6 महीने का ब्रिज कोर्स शुरू (यह तस्वीर AI द्वारा जनरेट की गई है।)

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जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। बीएड (बैचलर आफ एजुकेशन) करके देश भर के प्राइमरी स्कूलों में पढ़ा रहे शिक्षकों को केंद्र सरकार ने बड़ी राहत देते हुए उनके लिए एक स्पेशल ब्रिज कोर्स शुरू किया है। जो छह महीने का होगा। इसे वह नौकरी के साथ घर बैठे आसानी से कर सकेंगे।

इसके दायरे में बीएड करके प्राथमिक स्कूलों में पढ़ा रहे वे शिक्षक आएंगे, जिनकी नियुक्ति 28 जून 2018 से 11 अगस्त 2023 के बीच हुई है। हालांकि, देश में ऐसे शिक्षकों की संख्या कुल कितनी है कि मंत्रालय की मानें तो यह स्पष्ट नहीं है।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने गुरुवार को इस ब्रिज कोर्स की शुरुआत की है। साथ ही इसे लेकर एक पोर्टल भी शुरू किया। वहीं इस ब्रिज कोर्स के शुरू होते ही देश के अलग-अलग राज्यों से 76 हजार से अधिक शिक्षकों ने ब्रिज कोर्स के लिए पंजीयन कराया है।

इनमें सबसे अधिक 35 हजार से अधिक शिक्षक अकेले उत्तर प्रदेश के हैं। जबकि मध्य प्रदेश से 11373 ने पंजीयन कराया है, वहीं उत्तराखंड से 826 और बंगाल से 6948 शिक्षकों ने पंजीयन कराया है।

राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) का यह कोर्स ऐसे शिक्षकों की नौकरियों को पूर्ण सुरक्षा प्रदान करेगा, जिनके पास प्राथमिक स्तर के अध्यापन के लिए डीएलएड (डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजुकेशन) नहीं था।

एनसीटीई ने यह कदम सुप्रीम कोर्ट के आठ अप्रैल 2024 के ‘देवेश शर्मा बनाम भारत संघ एवं अन्य’ मामले में दिए गए फैसले के बाद उठाया है। इसमें कोर्ट ने प्राइमरी स्कूलों में पढ़ा रहे बीएड योग्यता वाले सेवारत शिक्षकों के लिए एक विशेष ब्रिज कोर्स तैयार करने को कहा था।

शिक्षा मंत्रालय के मुताबिक, यह कोर्स एनआइओएस की ओर से आनलाइन संचालित किया जाएगा। इसमें शिक्षक घर बैठे पढ़ाई कर सकेंगे। इस दौरान उन्हें स्कूलों में दस दिन का आनलाइन और 20 दिन का व्यावहारिक शिक्षण भी करना होगा।

ब्रिज कोर्स की पढ़ाई हिंदी और अंग्रेजी में होगी, लेकिन शिक्षक इसकी परीक्षा 22 भारतीय भाषाओं में से किसी भी भाषा में दे सकेंगे।