'एक साथ कई बीमारियों के शिकार हुए बच्चे'; MP में बच्चों की मौतों पर केंद्र की रिपोर्ट में खुलासा
बालाघाट में बच्चों की मौतों पर केंद्र की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि यह कई बीमारियों का एक साथ ...और पढ़ें

बालाघाट में बच्चों की मौत पर केंद्र की रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा

समय कम है?
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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के बालाघाट के आदिवासी इलाकों में बच्चों के बीच अचानक फैली बीमारी ने हड़कंप मचा दिया था। केंद्र सरकार की जांच टीम को इसमें कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं एक साथ देखने को मिली हैं।
डॉक्टरों के अनुसार बच्चों की जान जाने के पीछे सिर्फ एक बीमारी या कीटाणु नहीं है। खसरा, मलेरिया, सांस लेने में परेशानी, शरीर में पानी की कमी, खून की कमी, कुपोषण और शॉक जैसी कई वजहें एक साथ मिलकर बच्चों की हालत बिगाड़ रही थीं।
431 बच्चों की तबीयत बिगड़ी
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, अब तक 431 बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराया गया। राहत की बात यह है कि इनमें से 379 बच्चे ठीक होकर अपने घर लौट चुके हैं, जबकि 52 बच्चों का इलाज और देखभाल अभी जारी है।
बीमारी की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने अपनी जांच का दायरा केवल तीन गांवों तक सीमित न रखकर करीब 50 गांवों तक बढ़ा दिया है। अब तक 32,000 से ज्यादा लोगों की जांच की जा चुकी है।
मौके पर भेजी गई टीम
मामले की गंभीरता को देखते हुए 4 अगस्त को राष्ट्रीय स्तर पर समीक्षा बैठक हुई थी। इसके बाद 12 अगस्त को एक विशेष केंद्रीय दल (NJORT) और इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) की टीम को मौके पर भेजा गया।
जबलपुर के मेडिकल कॉलेज के विशेषज्ञ भी प्रभावित इलाकों में लगातार दौरे कर रहे हैं।
कई बच्चों की हुई मौत
जांच अधिकारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह आई कि शुरुआती दौर में कई बच्चों ने घर पर ही या अस्पताल पहुंचते-पहुंचते दम तोड़ दिया। इस वजह से डॉक्टरों को जांच के लिए खून के नमूने और शुरुआती इलाज के रिकॉर्ड नहीं मिल सके।
अब टीम घर-घर जाकर परिजनों से बातचीत कर रही है और पुरानी जानकारियों को जोड़कर मौतों की सही वजह का पता लगाने में जुटी है।
बीमारी को फैलने से रोकने के लिए तेजी से जमीनी स्तर पर बड़े कदम उठाए जा रहे हैं। 1 से 10 साल तक के 14 हजार से ज्यादा बच्चों को खसरा-रूबेला का अतिरिक्त टीका लगाया गया है।
पीने के पानी के 600 से ज्यादा स्त्रोतों की सफाई की गई है और 4 हजार से ज्यादा घरों में मच्छरमार दवा का छिड़काव किया गया है। बिरसा और बैहर जैसे दूर-दराज के इलाकों में छह मोबाइल मेडिकल गाड़ियां भेजी गई हैं, जहां डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मी सीधे लोगों तक पहुंच रहे हैं।
7 हजार से ज्यादा बच्चे कुपोषित
जांच के दौरान बच्चों में कुपोषण की बड़ी समस्या भी सामने आई। करीब 7,711 बच्चे गंभीर रूप से कुपोषित पाए गए, जिनमें से 518 बच्चों को पोषण सुधार केंद्रों में भर्ती कराया गया है।
इसके अलावा दस्त से पीड़ित 13,000 से ज्यादा और निमोनिया से पीड़ित 274 बच्चों की पहचान करके उनका समय पर इलाज शुरू किया गया।
सरकार का कहना है कि इन कड़े कदमों से अब हालात सुधर रहे हैं। बीते एक हफ्ते में बालाघाट में खसरे का एक भी नया मामला सामने नहीं आया है। फिर भी, खासकर पिछड़े आदिवासी और कमजोर जनजातीय समूहों की बस्तियों में निगरानी और डॉक्टरी मदद लगातार जारी रखी जा रही है।
