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बेल्जियम से ओडिशा, फिर यूपी तक पहुंचा... 308 पहियों वाले 'बाहुबली ट्रक' की इतनी क्यों हो रही है चर्चा?

Published: Sun, 27 Sep 2026 10:03 AM (IST)

सुनिए, अब रास्ता खाली कीजिए....क्योंकि बेल्जियम से आया 200 टन वजनी 'बाहुबली ट्रक' उत्तर प्रदेश पहुंच गया है। 308 पहियों ...और पढ़ें

यूपी पहुंचा यह अजूबा ट्रक।

यूपी पहुंचा यह अजूबा ट्रक।

HighLights

  1. बेल्जियम से बलरामपुर चीनी मिल के लिए विशाल वेसल।

  2. 308 पहियों वाला 200 टन वजनी 'बाहुबली ट्रक'।

  3. वाराणसी में 3 फुटओवर ब्रिज के हिस्से हटाए जाएंगे।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। कभी आपने किसी ऐसे ट्रक को देखा है, जिसके पहियों को गिनते-गिनते आप थक गए हों? सड़क पर चलते हुए बड़े-बड़े ट्रक दिखना आम बात है, लेकिन इन दिनों सोशल मीडिया पर एक ऐसे 'बाहुबली ट्रक' की चर्चा हो रही है, जिसने आम जनता से लेकर प्रशासन तक की नींद उड़ा रखी है।

बेल्जियम से आया करीब 200 टन वजनी भारी-भरकम मशीन लेकर चल रहा यह ट्रक इन दिनों उत्तर प्रदेश पहुंच चुका है। आप इसकी विशालता का अंदाजा इस बात से लगाय सकते हैं कि इसके रास्ते में आने वाले वाराणसी के 3 फुटओवर ब्रिज के कुछ हिस्सों को तोड़ना पड़ रहा है।

अब जानिए क्यों मंगवाया गया यह 'बाहुबली'?

बता दें कि यह पूरा मामला बलरामपुर चीनी मिल और एथेनॉल प्लांट से जुड़ा है, जिसके लिए विदेश से एक विशाल वेसल मंगाया गया है। यह भारी-भरकम मशीन समुद्र के रास्ते बेल्जियम से चलकर ओडिशा के पारादीप पोर्ट तक पहुंची थी।

Bahubali Truck

पोर्ट पर उतरने के बाद से ही इसे सड़क मार्ग के जरिए उत्तर प्रदेश के बलरामपुर पहुंचाया जा रहा है। इसका वजन और आकार इतना बड़ा है कि इसे ले जाने के लिए सामान्य गाड़ियां काम नहीं आ सकती थीं, इसलिए एक विशेष मल्टी-एक्सल बाहुबली ट्रक का सहारा लिया गया है।

क्यों कहा जा रहा है इसे 'बाहुबली ट्रक'?

इस बात को ऐसे समझा जा सकता है कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस ट्रक को साधारण नहीं माना जा सकता है। इसका सबसे बड़ा कारण है कि करीब 100 फीट लंबे इस ट्रक में कुल 308 पहिए लगाए गए हैं, ताकि 200 टन से ज्यादा के भारी-भरकम वजन को आसानी से संभाला जा सके और सड़क पर संतुलन बना रहे।

रफ्तार सुनकर उड़ जाएंगे आपके होश

दूसरी सबसे बड़ी और चौंकाने वाली बात इस बाहुबली की रफ्तार है। आप इस बात को जानकर हैरान हो जाएंगे कि अत्यधिक वजन और बड़े आकार के कारण यह बेहद धीमी गति से चल रहा है। जेएम बक्सी हैवी लॉजिस्टिक्स कंपनी की देखरेख में चल रहा यह महा-ट्रक 24 घंटे में केवल 8 से 10 किलोमीटर का ही सफर तय कर पा रहा है।

अच्छा, गौर करने वाली बात यह है कि इस ट्रक के लिए सफर इतना आसान नहीं रहा है। इसके लिए रूट भी एक बड़ी समस्या के तौर पर सामने आई है। इस बात को ऐसे समझिए कि ओडिशा से शुरू हुआ यह सफर झारखंड होते हुए बिहार के रोहतास, गया, औरंगाबाद और कैमूर से गुजरा और अब चंदौली के रास्ते उत्तर प्रदेश में प्रवेश कर चुका है।

कहीं काटनी पड़ी बिजली, तो कहीं ट्रंनों ने खुद को थामा

खास बात यह है कि उत्तर प्रदेश पहुंचने से पहले इस ट्रक को बिहार के कई जिलों से गुजरना पड़ा, जहां इसे निकालने में पसीने छूट गए। औरंगाबाद के बारुण में एक रेलवे ओवरब्रिज के नीचे से इस भारी-भरकम कंसाइनमेंट को सुरक्षित निकालने के लिए रेलवे की हाईटेंशन बिजली सप्लाई तक बंद करनी पड़ गई थी।

Bahubali Truck (1)

इतना ही नहीं सुरक्षा और तकनीकी कारणों को ध्यान में रखते हुए इस ट्रंप के आगमन के लिए कुछ देर के लिए ट्रेनों के पहिए भी रोकने पड़े थे और विशेष सर्विस लेन बनाकर इसे धीरे-धीरे आगे निकाला गया।

काशी में हटाने पड़ेंगे 3 फुटओवर ब्रिज

अच्छा, इस ट्रक का सफर अभी यहीं तक खत्म नहीं हुआ है। इसका बड़ा कारण है कि अब जब यह ट्रक उत्तर प्रदेश के चंदौली के रास्ते वाराणसी पहुंच रहा है, तो इसके सामने सबसे बड़ी चुनौती सामने आई है। प्रशासन और एनएचएआई (NHAI) की संयुक्त जांच में यह बात सामने आई है कि वाराणसी के रास्ते में 3 फुटओवर ब्रिज इस वाहन की राह में बाधा बन रहे हैं।

नियमों और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इन फुटओवर ब्रिज के कुछ हिस्सों को अस्थायी रूप से हटाया जाएगा और इस महा-वाहन के गुजरने के बाद उन्हें दोबारा तैयार किया जाएगा। इस दौरान ट्रैफिक और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं और पुलिस, हाईवे पेट्रोलिंग टीम व तकनीकी विशेषज्ञ लगातार इस काफिले के साथ चल रहे हैं।

अजूबे को देखने के लिए जुट रही भीड़, कब पहुंचेगा अपने मंजिल पर?

कुल मिलाकर इस बात में कोई दोराय नहीं है कि सड़क पर चलता हुआ यह अनोखा 'बाहुबली ट्रक' किसी अजूबे से कम नहीं है, जिसे देखने के लिए लोग सड़कों के किनारे इकट्ठा हो रहे हैं। ऐसे में अब देखना यह है कि यह महा-ट्रक अपनी तमाम बाधाओं को पार करते हुए कब तक सुरक्षित अपनी मंजिल यानी बलरामपुर पहुंच पाता है।