भूपेंद्र शर्मा, बागपत। जीवन के सात दशक पार करने के बाद पिस्तौल उठाकर पदकों और पुरस्कारों की झड़ी लगाने वाली शूटर दादियों की बायोपिक बनकर तैयार है। फिल्म ‘सांड की आंख’ के जरिये दुनिया चंद्रो तोमर और प्रकाशी तोमर के संघर्ष को जानेगी। जौहड़ी गांव की इन जेठानी-देवरानी ने गांव ही नहीं, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश की हजारों बेटियों को ऐसी राह दिखाई, जिसने उनका जीवन बदल दिया। भूमि पेडनेकर और तापसी पन्नू जैसी मंझी हुई अभिनेत्रियों ने दादियों के किरदार को किस अंदाज में निभाया है, इसकी झलक फिल्म के टीजर से मिल चुकी है।

फिल्म के निर्देशक तुषार हीरानंदानी, निर्माता अनुराग कश्यप और निधि परमार हैं। फिल्म दीपावली पर रिलीज होगी। इस फिल्म के निर्माण में करीब साढ़े तीन साल लग गए। चंद्रो तोमर की पौत्री शैफाली के पति सॉफ्टवेयर इंजीनियर सुमित राठी बताते हैं कि जुलाई 2012 में अभिनेता आमिर खान के टीवी शो सत्यमेव जयते में शूटर दादियां दिखाई दी थीं। इस शो की क्लिप यू-टयूब पर 2015 में तुषार हीरानंदानी ने देखी और शूटर दादियों की जिंदगी पर फिल्म बनाने का इरादा कर लिया। इस फिल्म को लेकर निर्माता अनुराग कश्यप से बात हुई, तो उन्होंने हामी भर दी। अनुराग ने 2016 में शूटर दादियों के परिवार से संपर्क किया।

सुमित बताते हैं कि उन दिनों वह मुंबई में ही एक सॉफ्टवेयर कंपनी में काम कर रहे थे। उनकी अनुराग से शूटर दादियों पर फिल्म बनाने को लेकर बात हुई। इसके बाद निर्देशक और निर्माता टीम के साथ जौहड़ी गांव पहुंचे और शूटर दादियों और उनके परिवार से मिले। टीम ने दादियों की जिंदगी के बारे में जाना। क्षेत्रीय भाषा सीखने पर जोर दिया गया। शूटर दादियों के शादी में पहने गए गहने, कपड़ों आदि के बारे में भी जानकारी जुटाई गई। तीन चार दिन टीम गांव में रहकर वापस चली गई। इसके बाद टीम फोन से शूटर दादियों से बात करती रही।

फिल्म के लिए अभिनेत्रियों की तलाश शुरू हुई। उम्रदराज अभिनेत्रियों ने शूटर दादियों का किरदार करने से इन्कार कर दिया, तो फिल्म से जुड़ी टीम हताश हो गई। युवा अभिनेत्रियों से बात की गई, लेकिन उन्होंने भी इनकार कर दिया। 2018 में तापसी पन्नू और भूमि पेडनेकर ने किरदार निभाने के लिए हां कर दी। शूटर दादियां मुंबई गईं और दोनों अभिनेत्रियों से मिलीं। दोनों ने दादियों की भाषा शैली, उठने-बैठने, कपड़ों आदि को लेकर बात की।

बड़े पर्दे पर दिखेगा दादियों का जौहड़ी गांव

11 फरवरी 2019 को दादियों के गांव जौहड़ी व मेरठ के आसपास के क्षेत्रों में फिल्म की शूटिंग शुरू हुई। इस दौरान तापसी चंद्रो तोमर के घर में ही रहीं और भूमि मेरठ या दिल्ली से शूटिंग के लिए आती थीं। शूटिंग के दौरान भी दोनों अदाकारा शूटर दादियों से सीन को लेकर बात करती रहती थीं। सुमित बताते हैं कि फिल्म के आखिरी दृश्य में चंद्रो और प्रकाशी को दिखाया जाएगा। उनके साथ प्रकाशी तोमर की पुत्री सीमा तोमर और चंद्रो तोमर की पौत्री शैफाली भी नजर आएंगी।

87 वर्षीय चंद्रो तोमर और 79 वर्षीय प्रकाशी तोमर का रिश्ता जेठानी-देवरानी का है। चंद्रो कहती हैं कि इंसान का तन बुड्ढा हो सकता है, लेकिन मन कभी बुड्ढा नहीं होता। प्रकाशी बताती हैं कि उन्हें देखकर गांव वालों ने अपनी बेटियों को शूटिंग रेंज के साथ-साथ निशानेबाजी प्रतियोगिताओं में भी भेजना शुरू कर दिया। ये बेटियां भी पदक लाने लगीं तो सबको लगा कि हम कुछ गलत नहीं कर रहे हैं। दोनों दादियां कहती हैं कि जब वे पिस्टल लेकर चलती थीं तो लोग उन्हें धाकड़ महिला कहने लगे थे। इरादे मजबूत थे इसलिए समाज की सोच भी बदल गई। जिस तरह से फिल्म बनी है, उससे दादियां पूरी तरह संतुष्ट हैं।

ये रहे संघर्ष के साक्षी

रिटायर्ड प्रवक्ता रमेंद्र कौशिक बताते हैं कि पुराना जमाना और वो भी ग्रामीण परिवेश। महिलाओं का घर से निकलना ही मुश्किल था। ऐसे में चंद्रो और प्रकाशी तोमर ने तमाम बाधाओं को पार कर जो कुछ किया, वह काबिल-ए-तारीफ है।

बुजुर्ग महिला शांति देवी बताती हैं कि हम भी देखा करते थे जब चंद्रो और प्रकाशी तोमर निशाना लगाने जाया करती थीं। तभी लगने लगा था कि दोनों का संघर्ष एक दिन जरूर रंग लाएगा। आज उनके चर्चे देशभर में हैं।

निशानेबाज वीना कहती हैं कि दादियों को देखकर ही उन्होंने भी निशानेबाजी का अभ्यास शुरू किया था।

Posted By: Sanjay Pokhriyal