ग्वालियर, राज्य ब्यूरो। शनिवार को मध्यप्रदेश के शिवपुरी जिले के ग्राम देवरी में मानो चमत्कार ही हो गया। दोपहर में खेलते हुए 160 फीट गहरे बोरवेल में गिरकर 15 फीट गहराई पर फंस गई डेढ़ साल की बच्ची को उसके पड़ोस में रहने वाले 14 वर्षीय किशोर ने बोरवेल में उल्टा लटक कर बाहर निकाल लिया। जिसने भी इस घटना के बारे में सुना, वह इसे नवरात्र में घटित चमत्कार ही कहता रहा।

डेढ़ साल की संस्कृति खेलते-खेलते 160 फीट गहरे बोरवेल में गिर गई

घटनाक्रम कुछ यूं है कि शिवपुरी जिले के खनियाधानां क्षेत्र के गांव देवरी में शुक्रवार को करीब 160 फीट गहरा बोरवेल करवाया गया था। पाइप डालकर इसे ढंका जाना शेष था। इसके अगले ही दिन शनिवार को डेढ़ साल की बच्ची संस्कृति पुत्री धर्मेद्र कुमार खेलते-खेलते बोरवेल के पास चली गई और उसमें गिर गई।

बोरवेल में संस्कृति के गिरने की खबर गांव में आग की तरह फैली

संस्कृति के घर के पड़ोस में रहने वाले सौरभ लोधी ने बताया कि जैसे ही स्वजनों को पता चला, सबके हाथ-पांव फूल गए। घटना गांव में आग की तरह फैली और ग्रामीण भी इकट्ठा हो गए। इसी बीच ग्रामीणों ने पाया कि बोरवेल के गड्ढे से बच्ची के रोने की आवाज आ रही है, मतलब बच्ची ज्यादा गहराई में न जाकर बीच में फंस गई है। यह अंदेशा होते ही ग्रामीणों में उम्मीद जागी।

ग्रामीणों ने दुबले-पतले 14 वर्षीय युवक को गड्ढे में उलटा लटकाया

समझदार ग्रामीणों ने एक दुबले-पतले 14 वर्षीय किशोर हेमंत को गढ्डे में उतारने के लिए मानसिक रूप से तैयार किया। फिर उसके पांव में रस्सी बांधकर उसे गड्ढे में उलटा लटकाया। यूं बोरवेल 9 इंची व्यास का था लेकिन शुरुआत में उसका मुंह करीब एक फीट चौड़ा था इसलिए किशोर आसानी से अंदर तक चला गया।

15 फीट गहराई तक जाकर युवक ने बच्ची को पकड़ा और बाहर लाया

करीब 15 फीट गहराई तक जाकर उसका हाथ बच्ची से टकराया। उसने बच्ची संस्कृति को मजबूती से पकड़ा और इशारा मिलते ही ऊपर मौजूद लोगों ने किशोर को रस्सी से ऊपर खींच लिया। इस तरह हेमंत और ग्रामीणों ने मिलकर डेढ़ साल की बच्ची को सकुशल गड्ढे से निकाल लिया। चूंकि स्वजनों और गांव वालों ने तुरंत ही सक्रियता दिखाते हुए बच्ची को सुरक्षित निकाल लिया , इसलिए पुलिस, प्रशासन को यह खबर नहीं दी गई।

जरा भी गड़बड़ होती तो अनर्थ हो जाता

प्रत्यक्षदर्शी सौरभ लोधी के मुताबिक, गनीमत थी कि संस्कृति 15 फीट गहराई पर अटक गई। यदि वह अंदर ज्यादा हलचल करती तो और गहराई में जा सकती थी। इधर, जब 14 वर्षीय हेमंत ने उसे पकड़ा तब उसने भी समझदारी दिखाते हुए पूरी मजबूती से बच्ची को कस कर पकड़ा क्योंकि यदि रस्सी खींचने पर हेमंत का संतुलन बिगड़ता और उसके हाथ से बच्ची छूट जाती तो अनर्थ हो सकता था।

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