सोंईंकलां(श्योपुर), नईदुनिया। मंदिरों में भगवान की मूर्तियों को सर्दियों में रजाई व कंबलों से ढंकने की परंपरा है। कुछ इसी तरह श्योपुर तहसील के सोंईखुर्द गांव में डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा को सर्दी से बचाने के लिए ग्रामीण कंबल ओढ़ा रहे हैं। इसकी तस्वीरें भी सामने आई हैं, आंबेडकर साहब की प्रतिमा को ठंड न लगे, इसके लिए बकायदा उनकी प्रतिमा को कंबल से ढका जाता है।

बाबा साहेब की प्रतिमा को कंबल ओढ़ाने की परंपरा
ददूनी ग्राम पंचायत की सोंईखुर्द बस्ती में बाबा साहब आंबेडकर की प्रतिमा लगी है। दलित बस्ती के लोग रोज शाम 5 से 6 बजे के बीच यहां आते हैं और प्रतिमा को कंबल ओढ़ाते हैं। कंबल ठीक उसी तरह ओढ़ाया जाता है, जैसे कोई इंसान सर्दी से बचने के लिए शॉल या कंबल ओढ़ता है।

धूप आते ही, हटा दिया जाता है कंबल
प्रतिमा के कानों तक कंबल ढका जाता है। यह कंबल रातभर बाबा साहब की प्रतिमा पर रहता है और सुबह 7 से 8 बजे के बीच जब धूप खुलती है तो उसे हटा दिया जाता है। जब से श्योपुर में सर्दी और शीतलहर ने जोर पकड़ा है, तब से लोग प्रतिमा को कंबल ओढ़ा रहे हैं।

सुबह-शाम करते हैं पूजा
सोंईखुर्द बस्ती में एक साल पहले, 16 जनवरी 2018 को डॉ. अंबेडकर की प्रतिमा स्थापित की गई थी। जब से प्रतिमा लगी है, तब से बस्ती के युवा व बच्चे सुबह-शाम यहां पूजा करने आते हैं। कई युवा नियमित तौर पर यहां अगरबत्ती लगाते हैं, तो कोई फूल चढ़ाने आता है। ग्रामीणों ने बताया कि हम भी बाबा साहब को सर्दी से बचाने के लिए कंबल ओढ़ा रहे हैं। गांव के ही नंदकिशोर जाटव ने बताया कि इस साल सर्दी बहुत है। हम रजाई-कंबल में रहे और बाबा साहब नहीं। इसलिए कंबल खरीदा और बाबा साहेब को ओढ़ाया।

Posted By: Nancy Bajpai