जागरण ब्यूरो, लखनऊ। सियासत में एक दूसरे के खिलाफ समझे जाने वाले काबीना मंत्री आजम खां और पूर्व मंत्री रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया लंबे समय बाद लखनऊ की 'कैंट कोठी' में एक दूसरे से मुखातिब हुए। दो घंटे तक चली इस मुलाकात पर दोनों ओर से चुप्पी है। मगर, माना जा रहा है कि मुजफ्फरनगर दंगे के बाद बदले सियासी हालात में एक-दूसरे को समर्थन पर उनके बीच रजामंदी हुई है। आजम ने राजा भैय्या को रामपुर में मौलाना जौहर अली मेडिकल कालेज के स्थापना समारोह में शामिल होने का न्योता भी दिया है।

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प्रतापगढ़ की कुंडा सीट से निर्दलीय विधायक राजा भैया लंबे समय से सपा के साथ हैं। सपा ने सरकार बनने पर उन्हें मंत्री पद दिया गया, मगर पार्टी महासचिव आजम खां से उनके सियासी रिश्ते अच्छे नहीं रहे। प्रतापगढ़ में डिप्टी एसपी की हत्या के बाद आजम व राजा भैया के रिश्तों और बिगड़ गए थे। राजा को पद छोड़ना पड़ा। सीबीआइ से क्लीन चिट मिलते ही उन्हें मंत्री बनाए जाने की सुगबुगाहट शुरू हुई, लेकिन आजम के वीटो ने रोड़ा लगा दिया।

अब मुजफ्फरनगर दंगों पर सियासी हमलों, अदालती नोटिस के बाद पार्टी में भी आजम को चुनौती मिलने लगी है। इन हालात में ही वह राजा भैया से मिलने पहुंच गए जिसके सियासी अर्थ निकाले जा रहे हैं। इस भेंट के बाद राजा भैया के मंत्री बनने की संभावना बढ़ गई है।

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