नई दिल्ली, माला दीक्षित । आखिरकार सात साल बाद सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या राम जन्मभूमि विवाद की सुनवाई का नंबर आ ही गया। सुप्रीम कोर्ट पांच दिसंबर से इस मामले पर नियमित सुनवाई शुरू करेगा। सबसे पहले भगवान श्री राम विराजमान की ओर से जन्मभूमि पर अपना दावा साबित करने के लिए बहस की जाएगी। ये महज संयोग ही है कि अयोध्या जन्मभूमि विवाद पर नियमित सुनवाई के लिए तय तिथि (पांच दिसंबर) विवादित ढांचा ढहने की तिथि (छह दिसंबर) से ठीक एक दिन पहले की है।

अयोध्या में विवादित ढांचा 6 दिसंबर 1992 को ढहाया गया था। हालांकि ढांचा ढहने का मुकदमा दूसरा है और उसकी सुनवाई लखनऊ की विशेष अदालत में चल रही है। यह मुकदमा राम जन्मभूमि पर मालिकाना हक का है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 30 सिंतबर 2010 को 2-1 के बहुमत से जमीन को तीन हिस्सों में बांटने का आदेश दिया था लेकिन भगवान श्री राम विराजमान सहित किसी भी पक्ष को जमीन बंटवारे का फैसला स्वीकार्य नहीं है और सभी ने फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा न्यायमूर्ति अशोक भूषण व न्यायमूर्ति अब्दुल नजीर की पीठ ने शुक्रवार को पक्ष प्रतिपक्ष की गरमागरम बहस के बीच सुनवाई की रूपरेखा खींचते हुए नियमित सुनवाई की तिथि तय कर दी। हालांकि सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड अंत तक तैयारी न होने की दलील देते हुए सुनवाई की तिथि जनवरी में रखने की मांग करता रहा।

कमोवेश यही रुख निर्मोही अखाड़े का भी था। लेकिन उत्तर प्रदेश की योगी सरकार और रामलला की ओर से मामले की जल्दी सुनवाई की तिथि तय करने का अनुरोध किया गया। पहले होगी अपीलों पर सुनवाई कोर्ट ने सुनवाई की तिथि तय करते हुए साफ किया कि कोर्ट सबसे पहले अपीलों पर सुनवाई करेगा। अंतरिम अर्जियों और हस्तक्षेप याचिकाओं पर उसके बाद विचार किया जायेगा। हाईकोर्ट में कुल चार मुकदमें थे जिसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में 13 अपीलें हैं। वैसे तो मुख्यता तीन पक्षकार हैं रामलला विराजमान, निर्मोही अखाड़ा और सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड जिनके बीच जमीन के बंटवारे का आदेश था।

सुप्रीम कोर्ट में क्रास अपीलें हैं। इन तीन पक्षों के अलावा हाईकोर्ट में पक्षकार रहे हिन्दू महासभा व अन्य की भी अपीलें हैं। हिन्दू महासभा के वकील हरिशंकर जैन ने कोर्ट के सामने अपनी अपील का जिक्र किया।सबसे पहले रामलला की ओर से होगी बहसपांच दिसंबर को बहस की शुरुआत रामलला की ओर से होगी। कोर्ट ने रामलला के वकील सीएस वैद्यनाथन और सौरभ सिंह शमशेरी से कहा कि कोर्ट उनकी अपील से सुनवाई शुरू करेगा। पीठ ने कहा कि जिन संबंधित पक्षकारों को नोटिस नहीं मिला है उन्हे दो सप्ताह मे नोटिस भेजा जाए। जिनकी मृत्यु हो गई है उनके कानूनी वारिसों की पक्षकार बनने की अर्जियां स्वीकार करते हुए कोर्ट ने उन्हें भी नोटिस भेजने का आदेश दिया।अखबार मे छपेगा सुनवाई का नोटिससुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई की सूचना सभी पक्षों को पहुंचाने के लिए रजिस्ट्री को आदेश दिया है कि वह चार सप्ताह में स्थानीय हिन्दी भाषा और अंग्रेजी भाषा के बड़े अखबारों में सुनवाई का नोटिस छपवाये।

यूपी कराएगा मौखिक दलीलों का अनुवादकोर्ट ने यूपी के एडवोकेट जनरल राघवेन्द्र सिंह और तुषार मेहता से कहा कि वे हाईकोर्ट के फैसले में हिन्दी में दर्ज सभी मौखिक दलीलों का दस सप्ताह में अंग्रेजी में अनुवाद करा कर कोर्ट में पेश करें। यूपी ने इसके लिए हामी भी भर दी। कोर्ट ने पक्षकारों को दस्तावेजों के अनुवाद के लिए 12 सप्ताह का समय दिया है। साथ ही साफ किया इसके बाद अनुवाद के लिए सुनवाई स्थगित नहीं होगी। पूजा के मौलिक हक का हो रहा है हननसुब्रमण्यम स्वामी ने अपनी अर्जी पर सुनवाई की मांग करते हुए कहा कि उनके पूजा अर्चना के मौलिक अधिकार का हनन हो रहा है।

पहले उनसे कहा गया कि हाईकोर्ट में जमीन के मुकदमे का फैसला आ जाने दो और बाद में सुप्रीम कोर्ट में सात साल से मामला लंबित है। अगर पहले राम जन्मभूमि पर पूजा अर्चना के उनके मौलिक अधिकार के संवैधानिक मुद्दे को तय कर दिया जाए तो फिर आगे सुनवाई के लिए कुछ बचेगा ही नहीं क्योंकि मौलिक अधिकार संपत्ति के अधिकार से ऊपर होता है। कोर्ट अयोध्या भूमि अधिग्रहण में संविधानपीठ के इस्माइल फारुखी फैसले के आधार पर मामला तय करे। लेकिन निर्मोही अखाड़ा और सुन्नी बोर्ड ने स्वामी का जोरदार विरोध किया कहा ये पक्षकार नहीं है इन्हें सुनवाई का हक नहीं है।

हालांकि कोर्ट ने स्वामी से कहा कि वे मुख्य मामले के बाद उन्हें सुनेंगे। शिया बोर्ड की याचिका पर बाद में होगा विचारबाबरी के विवादित ढांचे को शिया वक्फ घोषित करने की मांग वाली शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड की याचिका पर कोर्ट मुख्य अपीलों के बाद विचार करेगा। कोर्ट ने बोर्ड की ओर से पेश वकील एमसी धींगरा से कहा कि बोर्ड मुख्य अपीलों में भी पक्षकार है पहले वह उसमें अपना पक्ष रखे बाद में इस याचिका पर विचार होगा। धींगरा ने कहा कि शिया बोर्ड ने दाखिल जवाब में मामले के हल का फार्मूला दिया है। हालांकि सुन्नी बोर्ड ने निचली अदालत के फैसले को इतने साल बाद सीधे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने वाली शिया बोर्ड की याचिका पर सवाल उठाया।
 

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By Manish Negi