शहडोल, राज्य ब्यूरो। औरंगाबाद रेल हादसे में मृत मप्र के शहडोल व उमरिया जिलों के 16 श्रमिकों का शनिवार को उनके गांवों में अंतिम संस्कार किया गया। शहडोल के अंतौली गांव में एक साथ नौ शवों को दफनाया गया और दो की अंत्येष्टि की गई। वहीं उमरिया के नेउसा गांव में एक साथ चार मजदूरों की चिताएं जलीं और एक अन्य मजदूर का अंतिम संस्कार ग्राम चिल्हारी में किया गया।

औरंगाबाद रेल हादसे के शिकार हुए मजदूरों के शव शनिवार शाम चार बजे शहडोल रेलवे स्टेशन पहुंचे। यहां से एंबुलेंस से नौ शव अंतौली, एक-एक शव शहरगढ़ और बैरिहा गांव भेजा गया, जबकि पांच के शव उमरिया भेजे गए।

50 लाख रुपये मुआवजे की मांग

शहडोल के अंतौली गांव में स्वजनों ने सरकार और उसकी नीतियों का विरोध किया। उनकी मांग थी कि शिवराज सरकार मुआवजे के तौर पर 50 लाख रुपये और आश्रितों को रेलवे की नौकरी दिलवाए। शहडोल के कमिश्नर डॉ. अशोक भार्गव और कलेक्टर डॉ. सतेंद्र सिंह ने स्वजनों को समझाया और आश्वासन दिया कि वे उनकी बात मुख्यमंत्री तक पहुंचाएंगे।

गांव से एक किमी पहले खुदवाए गड्र्ढे

शहडोल जिला प्रशासन ने शवों को दफनाने के लिए गांव से एक किमी पहले ही गड्र्ढे खुदवा रखे थे। स्वजनों और जमीन मालिक की मांग थी कि शव को यहां न दफनाकर मजदूरों की पुस्तैनी भूमि पर दफनाया जाए। कोरोना बीमारी को देखते हुए ग्रामीण वहीं दफनाने के लिए राजी हो गए।

चेहरा भी नहीं देख पाए स्वजन

कोरोना संक्रमण के कारण सभी शवों को बहुत ही सावधानी से रखा गया था। सभी शव की पहचान करने के बाद उनके ऊपर नाम की चिट चिपका दी गई थी। जब शव दफनाने की बारी आई तो नाम पढ़कर उनके स्वजनों को बताया गया और उन्हें दूर से ही अंतिम प्रणाम करने का अवसर दिया गया। स्वजन बार-बार अंतिम बार चेहरा देखने की मांग करते रहे, लेकिन प्रशासन ने उन्हें शव के पास नहीं जाने दिया।

एएसपी ने पढ़ा गायत्री मंत्र

एएसपी प्रतिमा एस मैथ्यूज ने गायत्री मंत्र पढ़कर शव को दफनाने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया। अंत्येष्टि के काफी देर बाद तक अधिकारी गांव में ही डटे रहे।

कोविड-19 के कारण शव स्वजनों को नहीं देते हुए उन्हें दफना दिए गए। कुछ स्वजन मुआवजा राशि को लेकर बात कर रहे थे, जिन्हें समझाइश दी गई है- डॉ. अशोक भार्गव, कमिश्नर, शहडोल संभाग।

बूढ़े पिता के रोने से नम हुई कलेक्टर की आंखें

उमरिया जिले की पाली जनपद क्षेत्र की ग्राम पंचायत ममान के ग्राम नेउसा में एक साथ चार मजदूरों की अर्थियां उनके घरों से निकलीं। अपने जवान बेटों के शवों को देख रोते हुए बूढ़े पिता जोधी सिंह और चैन सिंह को देखकर हर किसी का कलेजा फटने लगा। इस दृश्य ने कलेक्टर स्वरोचिष सोमवंशी की आंखों को नम कर दिया। वहीं ग्राम पंचायत चिल्हारी के अच्छेलाल पिता रामेश्वर कुशवाहा का भी अंतिम संस्कार किया गया।

मैंने सभी को बचाने की कोशिश की, वीरेंद्र सिंह हादसे में घायल 

उमरिया का वीरेन्द्र सिंह घर पहुंचते ही बेसुध हो गया। थोड़ी देर बाद उसने बताया कि उसने ट्रेन को आते देख लिया था और चीख-चीखकर अपने साथियों को आवाज लगाई थी, लेकिन कोई भी नींद से नहीं जागा। हादसे में उसके भाई बिगेन्द्र सिंह की भी मौत हो गई है।

Posted By: Bhupendra Singh

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