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'कानूनी है लेकिन, पारदर्शी नहीं', पूर्व चुनाव आयुक्त अशोक लवासा ने SIR पर उठाए सवाल

Published: Fri, 04 Sep 2026 11:20 PM (IST)

पूर्व चुनाव आयुक्त अशोक लवासा ने वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (एसआईआर) को लाखों लोगों पर थोपी गई अनुचित प्रक्रिया बताया है।

पूर्व चुनाव आयुक्त अशोक लवासा।

 पूर्व चुनाव आयुक्त अशोक लवासा।

HighLights

  1. अशोक लवासा ने वोटर लिस्ट एसआईआर को अनुचित प्रक्रिया बताया।

  2. न्यायपालिका द्वारा सही ठहराने के बावजूद पारदर्शिता पर सवाल उठाए।

  3. कहा, कानून की भावना का सम्मान करना भी आवश्यक है।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। पूर्व चुनाव आयुक्त अशोक लवासा ने वोटर लिस्ट के चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (एसआईआर) को लाखों लोगों पर थोपी गई एक अनुचित प्रक्रिया बताया है। उन्होंने कहा कि भले ही न्यायपालिका ने इस प्रक्रिया को सही ठहराया है और सरकार ने इसे कानूनी माना है, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह पारदर्शी है।

एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफार्म्स द्वारा आयोजित जगदीप सिंह छोकर मेमोरियल लेक्चर में गुरुवार को लवासा ने कहा, "बेशक यह कानूनी है। लेकिन क्या यह उचित है। सवाल यही है, क्योंकि न्याय का असली मतलब यही है।

लवासा ने कहा कि वैधानिक संस्थाएं, संवैधानिक निकाय और सरकारें अक्सर इस सिद्धांत पर काम करती दिखती हैं कि वे जो कुछ भी करती हैं, वह सही है क्योंकि वह कानूनी रूप से मान्य है।

लवासा ने आगे इस बात पर जोर दिया कि एसआईआर प्रक्रिया को लाखों नागरिकों पर थोपी गई एक अनुचित प्रक्रिया बताया और कहा कि जिसकी लाठी उसकी भैंस वाली सोच अब पुरानी हो चुकी है। जिन संस्थाओं को कानून लागू करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है, उन्हें कानून की भावना का भी सम्मान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि न्याय का मतलब सिर्फ कानून के शब्दों को लागू करना नहीं, बल्कि उसकी भावना की रक्षा करना भी है।