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अरुणाचल में हाइड्रो प्रोजेक्ट के विरोध में हिंसक प्रदर्शन पर केंद्र का एक्शन, RAF के 250 जवान भेजे

Published: Sun, 25 Oct 2026 05:00 PM (IST)

अरुणाचल प्रदेश में सियांग अपर बहुउद्देशीय परियोजना के विरोध में हिंसक प्रदर्शन हुए, केंद्र सरकार ने स्थिति को नियंत्रित करने ...और पढ़ें

अरुणाचल में हाइड्रो प्रोजेक्ट के विरोध में हिंसक प्रदर्शन पर केंद्र का एक्शन (फोटो- ANI)

अरुणाचल में हाइड्रो प्रोजेक्ट के विरोध में हिंसक प्रदर्शन पर केंद्र का एक्शन (फोटो- ANI)

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अरुणाचल प्रदेश में प्रस्तावित 11,200 मेगावाट की सियांग अपर बहुउद्देशीय परियोजना को स्थानीय जनजातियों के कड़े विरोध का सामना करना पड़ रहा है। इसको लेकर पूर्वी सियांग जिले के पासीघाट में हिंसा भड़क गई और उपद्रवियों ने जमकर तोड़फोड़ की।

हिंसक विरोध को देखते हुए केंद्र सरकार ने मोर्चा संभाल लिया है। गृह मंत्रालय के निर्देश पर केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की दंगा-रोधी इकाई 'रैपिड एक्शन फोर्स' (RAF) की दो कंपनियों (करीब 250 जवानों) को भारतीय वायुसेना के विमान से नवी मुंबई से पासीघाट एयरलिफ्ट किया गया है।

इन इकाइयों के रविवार तक पासीघाट पहुंचने और तैनात किए जाने की उम्मीद है।

दरअसल, शुक्रवार रात बंद खत्म होने के बाद उपद्रवियों ने एनएचपीसी कार्यालय और एक पुलिस थाने में आग लगा दी, साथ ही राज्य भाजपा अध्यक्ष और दो विधायकों के आवासों पर तोड़फोड़ व लूटपाट की।

40 से अधिक पुलिसकर्मी घायल

करीब नौ घंटे तक चले इस उपद्रव और पथराव में 40 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हो गए, जिसके बाद प्रशासन ने पासीघाट, मेबो और रुक्सिन में सभाओं व जुलूसों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है।

बताते चलें कि नीली वर्दी के लिए पहचानी जाने वाली रैपिड एक्शन फोर्स सीआरपीएफ की एक विशेष दंगा-रोधी इकाई है। राज्य के हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में सीआरपीएफ की कई टुकड़ियां पहले से ही तैनात हैं, जबकि अरुणाचल प्रदेश में आंतरिक सुरक्षा के मद्देनजर सीआरपीएफ की दो से तीन बटालियनें स्थायी तौर पर मौजूद रहती हैं।

सीआरपीएफ ने संभाला मोर्चा

अधिकारियों ने बताया कि सीआरपीएफ कर्मियों ने शुक्रवार से ही प्रदर्शनों को प्रभावी ढंग से संभाला और हिंसा को भड़कने से रोका। उन्होंने आगे बताया कि झड़पों के दौरान कई पुलिस और केंद्रीय बलों के जवान घायल हुए।

अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार लोकतंत्र का एक अनिवार्य हिस्सा है, लेकिन उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रदर्शन कानून की सीमाओं के भीतर ही रहने चाहिए और उनसे संपत्ति को नुकसान या सार्वजनिक व्यवस्था में बाधा नहीं आनी चाहिए।

मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, प्रस्तावित विद्युत परियोजना के विरोध में सियांग, अपर सियांग और पूर्वी सियांग जिलों में शुक्रवार को 12 घंटे का बंद काफी हद तक शांतिपूर्ण रहा। हालांकि, बंद समाप्त होने के बाद पासीघाट में हिंसा भड़क उठी और शनिवार सुबह 3:30 बजे तक जारी रही।

क्यों हो रहा इस परियोजना का विरोध

प्रस्तावित 11200 मेगावाट की सियांग परियोजना को तिब्बत में चीन द्वारा बनाए जा रहे विशाल बांध के जवाब के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, स्थानीय जनजातीय समुदाय इसका लगातार विरोध कर रहे हैं। उनका मानना है कि बांध के विशाल जलाशय से कई गांव जलमग्न हो जाएंगे, उपजाऊ जमीनें डूब जाएंगी और सदियों पुराना प्राकृतिक व सांस्कृतिक जुड़ाव खत्म हो जाएगा।

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