नई दिल्ली, आइएएनएस।  सियाचिन और लद्दाख जैसे ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तैनात सेना के जवानों के पास न तो स्नो ग्लास हैं और न ही उन्हें पहनने के लिए बहुउद्देश्यीय जूते मिले हुए हैं। उन्हें बहुत ऊंचे स्थान के लिए अपेक्षित खाना तक नहीं मिलता है। नतीजतन भीषण ठंड के चलते उन्हें बीमारियां घेर लेती हैं।

राज्यसभा को सौंपी रिपोर्ट में कैग ने दी जानकारी            

भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (कैग) ने राज्यसभा को सौंपी एक रिपोर्ट में इस बात की जानकारी दी है। इस रिपोर्ट को लोकसभा में नहीं रखा जा सका। नियंत्रक और महालेखा परीक्षक राजीव महर्षि को रिपोर्ट जारी भी नहीं करने दिया गया। लेकिन, राज्यसभा के कुछ सूत्रों, जो रिपोर्ट देख चुके हैं, ने दावा किया कि इसमें ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भारतीय सैनिकों को जिन हालात में तैनात रहना पड़ता है, उसका वर्णन किया गया है।

खुला रहता है चेहरा और आंखें                      

सूत्रों के अनुसार, सेना में बर्फ वाले चश्मे की कमी 62 फीसद से 98 फीसद तक है। इससे भीषण सर्दी में भी सैनिकों का चेहरा और आंखें खुली रहती हैं। नवंबर 2015 से सितंबर 2016 तक सैनिकों को बहुउद्देश्यीय जूतों की आपूर्ति नहीं की गई, जिससे उनको पुराने और इस्तेमाल किए जा चुके जूतों से काम चलाना पड़ा।

पुराने ढंग के फेस मास्क, जैकेट और स्लीपिंग बैग                   

सूत्रों के मुताबिक, स्थिति बहुत दयनीय है। अत्यंत ऊंचाई वाले इलाकों में भारतीय सरहद की रक्षा में तैनात जवानों को पुराने ढंग के फेस मास्क, जैकेट और स्लीपिंग बैग दिए जाते हैं। उन्नत वस्तुओं से वे वंचित ही रहते हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि रक्षा प्रयोगशालाओं में शोध और विकास के अभाव में उन्हें लगातार आयात पर निर्भर रहना पड़ता है।

Posted By: Manish Pandey

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