पुणे, प्रेट्र। चीन और नेपाल के बढ़ रहे संबंधों से चिंतित होने की जरूरत नहीं है। यह बात थलसेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने कही है। रविवार को वह बिम्सटेक के भारत सहित सात देशों के संयुक्त सैन्य अभ्यास के समापन समारोह में बोल रहे थे। भारत, श्रीलंका, बांग्लादेश, म्यांमार, और भूटान ने इस लघु अभ्यास में हिस्सा लिया जबकि नेपाल और थाइलैंड ने इसमें अपने निरीक्षक भेजे।

Image result for bipin rawat

थलसेना अध्यक्ष जनरल बिपिन रावत ने कहा, भौगोलिक कारणों से नेपाल और भूटान का भारत की ओर झुकाव है। नेपाल के चीन से बढ़ते संबंधों पर जनरल रावत ने कहा, यह थोड़े समय का मामला है। नेपाल और भूटान का चीन से दुर्गम संपर्क है। यह संपर्क स्वाभाविक और लंबे समय के लिए नहीं बना रह सकता। इसलिए नेपाल और चीन के संबंधों पर चिंता करने की जरूरत नहीं है।

उन्होंने इस सिलसिले में पाकिस्तान और अमेरिका के संबंधों का उदाहरण दिया। कहा, इस तरह के संबंध अस्थायी होते हैं और यह परिस्थितियों के अनुसार बदल जाते हैं। भारत का पूरा ध्यान खुद को मजबूत बनाने की ओर है, हम किसी की चिंता में नहीं पड़े हैं। भारत सरकार की नीति पड़ोसी देशों के साथ अच्छे संबंध रखने की है। सेना उसी दिशा में कार्य कर रही है। चूंकि हम क्षेत्र के सबसे बड़े देश हैं, इसलिए सहयोग की बड़ी जिम्मेदारी भी हमारी बनती है।

Image result for subhas bhamare

बिम्सटेक के दायरे में विकसित होंगे रिश्ते : भामरे 
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री सुभाष भामरे ने कहा, पड़ोसी देशों के साथ सहयोग और पूर्वी देशों से संबंधों का विकास, मोदी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। यह कार्य बिम्सटेक (बंगाल की खाड़ी के इर्द-गिर्द बसे देशों के तकनीक और आर्थिक सहयोग संगठन) के दायरे में होगा।

भामरे ने कहा, हमारे नेताओं ने सुरक्षा, आतंकवाद के खिलाफ, आपदा प्रबंधन, संपर्क मार्ग, व्यापार, कृषि, गरीबी उन्मूलन में क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाने का फैसला किया है। हम क्षेत्रीय लोगों के बीच आपसी संपर्क बढ़ाना चाहते हैं जिससे दीवारें हटें और परस्पर मिलकर आगे बढ़ने की भावना विकसित हो।

 

Posted By: Arun Kumar Singh