भाषा संरक्षण का नया अध्याय, असमिया, बंगाली, पाली, मराठी और प्राकृत भाषाओं के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस को मंजूरी
शिक्षा मंत्रालय ने असमिया, बंगाली, पाली, मराठी और प्राकृत भाषाओं के अध्ययन के लिए पांच सेंटर आफ एक्सीलेंस स्थापित करने की मंजूरी दी है।

असमिया, बंगाली, पाली, मराठी और प्राकृत भाषाओं के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस को मंजूरी
HighLights
पांच केंद्रों की स्थापना कई विश्वविद्यालयों में की जाएगी
सीएम मोहन माझी बोले यह ओडिशा के लिए गर्व का क्षण है
पीटीआई, नई दिल्ली। शिक्षा मंत्रालय ने असमिया, बंगाली, पाली, मराठी और प्राकृत भाषाओं के अध्ययन के लिए पांच सेंटर आफ एक्सीलेंस स्थापित करने की मंजूरी दी है।
ये पांच केंद्र इन शास्त्रीय भाषाओं की विरासत के शैक्षणिक अनुसंधान, डिजिटलीकरण, संरक्षण और प्रसार को मजबूत करने के लिए स्थापित किए जाएंगे।
इन पांच केंद्रों की स्थापना जिन विश्वविद्यालयों में की जाएगी, उनमें तेजपुर विश्वविद्यालय, विश्व भारती विश्वविद्यालय, केंद्रीय ओडिशा विश्वविद्यालय, गुजरात केंद्रीय विश्वविद्यालय और पुणे स्थित डेक्कन कालेज पोस्ट ग्रेजुएट एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट शामिल हैं।
ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कहा, "यह ओडिशा के लिए गर्व का क्षण है और भारत की समृद्ध भाषाई विरासत को संरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी इस घटनाक्रम की सराहना करते हुए कहा, "केंद्र सरकार द्वारा मराठी भाषा को शास्त्रीय भाषा का दर्जा देने का निर्णय लेने के बाद 'शास्त्रीय मराठी अध्ययन उत्कृष्टता केंद्र' स्थापित करने के लिए केंद्र सरकार के साथ प्रयास किए जा रहे थे।"
