नई दिल्ली, प्रेट्र। सुप्रीम कोर्ट में एक ताजा याचिका दायर कर मुस्लिम समुदाय में कई बीवियां होने की प्रथा और निकाह-हलाला को अवैध और असंवैधानिक घोषित करने की एक नई याचिका दायर की गई है।

निकाह-हलाला एक ऐसा रिवाज है जिसमें तलाक की सूरत में एक पुरुष अपनी पूर्व पत्नी से दोबारा शादी नहीं कर सकता है जब तक कि वह महिला किसी और से शादी करने के बाद तलाक न ले ले। इस तलाक के बाद भी महिला को अलग रह कर 'इद्दत' की मुद्दत बितानी होती है। इसके बाद ही उस महिला की उसके पहले शौहर से दोबारा शादी हो सकती है।

दिल्ली की एक महिला की ओर से दायर की गई इस याचिका में कहा गया है कि मुस्लिम पर्सनल लॉ की आइपीसी की धारा 494 (पति या पत्नी के जीवनकाल में दोबारा शादी करना) को मुसलमानों के लिए अयोग्य बताया गया। लेकिन मुस्लिम समुदाय की किसी भी शादीशुदा महिला को यह हक ही नहीं दिया गया है कि वह दो शादियां करने पर अपने पति के खिलाफ शिकायत दर्ज करने का हक भी नहीं है।

याचिकाकर्ता के वकील अश्विनी कुमार दुबे ने कहा कि संविधान के तहत समानता के अधिकार यानी अनुच्छेद 14, 15 (धर्म, प्रजाति, जाति, लिंग या स्थान के आधार पर) और 21 (जीवन जीने का अधिकार और व्यक्तिगत स्वतंत्रता) के अधिकार का उल्लंघन है। इस याचिका में मुस्लिम विवाह अधिनियम, 1939 को असंवैधानिक घोषित करने और अनुच्छेद 14, 15, 21 और 25 के उल्लंघन की भी बातचीत की गई है। 

By Manish Negi