नई दिल्ली,एजेंसी। देश की सबसे बड़ी अस्पताल श्रृंखलाओं में से एक अपोलो हॉस्पिटल्स का कहना है कि वह टियर II और टियर III शहरों में मौजूद अपने अस्पतालों को आयुष्मान योजना में शामिल करेगा। साथ ही कहा कि महानगरीय शहरों में यह तब तक दूर रहेगा जब तक सरकार कार्यक्रम के तहत सर्जरी और उपचार के लिए दरों में बढ़ोतरी नहीं करती है। 

योजना को पूरा हुआ एक साल

इस योजना को प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के रूप में भी जाना जाता है, पिछले सप्ताह ही इस योजना को एक साल पूरा हुआ है। इन 12 महीनों में लगभग 4.6 मिलियन अस्पताल ने 7,000 करोड़ रुपये का उपचार किया है। सभी राज्यों और केंद्र शासीत प्रदेशों में इस योजना तो लागू किया गया है। लेकिन, अपोलो अस्पताल इससे दूर रहा। इस महीने की शुरुआत में, जब मेदांता डॉस्पिटल ने परियोजना में एम्पैनियल के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए तब अपोलो ने ये फैसला लिया है।

अपोलो की प्रबंध निदेशक ने कही ये बात

खबरों के मुताबिक अपोलो की प्रबंध निदेशक सुनीता रेड्डी ने कहा कि उन्होंने आयुष्मान भारत के लिए टियर- II और टियर- III शहरों के अस्पतालों में  का पांच प्रतिशत बेड आयुष्मान योजना के लिए आवंटित किया हैं। उन्होंने ये सुनिश्चित किया कि उनकी भागीदारी भी एक परीक्षण चरण में है यह उन राज्यों में चल रहा था जहां केंद्रीय कार्यक्रम में स्थानीय स्वास्थ्य योजनाओं को रखा गया था।

महानगरीय शहरों के लिए, जहां लागत बहुत अधिक है, इस कारण हॉस्पिटल को इससे बाहर रखा गया हैं। उन्होंने कहा कि अस्पताल संघों ने योजना के नए मूल्य निर्धारण दिशानिर्देशों पर केंद्र सरकार के साथ बातचीत कह रहे है।  रेड्डी ने कहा, कार्यक्रम के तहत कुछ सर्जरी के लिए लागत को कवर नहीं किया।

इसके अलावा संयुक्त उद्यम बीमा फर्म और फार्मेसी व्यवसाय में स्टैक बेचने के बाद अपने ऋण को खत्म करने पर ध्यान केंद्रित किया है। इस महीने की शुरुआत में सुनीता रेड्डी  ने अपोलो हॉस्पिटल्स एंटरप्राइजेज में अपनी 3.6 प्रतिशत हिस्सेदारी 748 करोड़ रुपये में बेच दी। धन का उपयोग ऋण का भुगतान करने और प्रमोटर शेयर प्रतिज्ञाओं को कम करने के लिए किया जा रहा है।

Edited By: Ayushi Tyagi