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राज्यसभा में भी पास हुआ एंटी-पेपर लीक बिल, जानिए विधेयक में क्या है खास

Published: Thu, 30 Jul 2026 10:27 PM (IST)Updated: Fri, 31 Jul 2026 12:05 AM (IST)

लोकसभा से पारित लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक-2026 अब राज्यसभा में भी पास हो गया है।

लोकसभा के बाद राज्यसभा में भी पास हुआ एंटी-पेपर लीक बिल

लोकसभा के बाद राज्यसभा में भी पास हुआ एंटी-पेपर लीक बिल

HighLights

  1. लोक परीक्षा संशोधन विधेयक-2026 राज्यसभा में पारित हुआ।

  2. राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह विधेयक कानून बनेगा।

  3. 5-10 वर्ष की सजा और 50 लाख रुपये तक जुर्माना

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। लोकसभा से पारित हो चुका लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक-2026 गुरुवार को राज्यसभा में केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने प्रस्तुत किया।

लोकसभा के बाद अब ये बिल राज्यसभा से भी पास हो गया है। यह विधेयक राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद कानून बन जाएगा। इस बिल के जरिए सरकार नकल माफियाओं पर नकेल कसने की तैयारी में है।

विधेयक की खास बातें

  • अनुचित साधनों के इस्तेमाल पर 5-10 वर्ष की सजा और 50 लाख रुपये तक जुर्माना।
  • संगठित अपराध में सजा 7-10 वर्ष होगी। 10 करोड़ रुपये तक जुर्माना भी भरना होगा।
  • सेवा प्रदाताओं पर पांच करोड़ रुपये जुर्माना। परीक्षा आयोजन पर आठ वर्ष तक रोक।
  • सेवा प्रदाताओं के निदेशकों व प्रबंधन को 5-10 वर्ष सजा और पांच करोड़ रुपये जुर्माना।
  • स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट बनेंगे। दो माह में जांच और आरोपपत्र की तिथि से तीन माह में ट्रायल।
  • विशेष लोक अभियोजक की नियुक्ति होगी। जरूरत पर एसटीएफ या केंद्रीय एजेंसी से जांच।

राज्यसभा में एंटी-पेपर लीक बिल पास

संशोधित विधेयक के प्रविधानों का ब्योरा देते समय जब विपक्षी सांसदों ने बैठे-बैठे नारेबाजी और टिप्पणियां शुरू कीं तो केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने चुटकी ली, 'शायद तीर सही निशाने पर लगा है।'

वहीं, विपक्ष ने कानूनी प्रविधानों को सुधार के लिए नाकाफी बताते हुए सरकार की नीयत पर प्रश्न खड़े किए। नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सरकार से पांच प्रश्न पूछते हुए कहा कि गृह मंत्री इनका जवाब दें या इस्तीफा दें ।

मानसून सत्र के आरंभ से सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच चल रही रस्साकशी गुरुवार को भी राज्यसभा में देखने को मिली। सुबह 11 बजे सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विशेष रूप से कांग्रेस सदस्यों ने 'गृह मंत्री सदन में आओ' के नारे के साथ हंगामा शुरू कर दिया।

इसके बावजूद जब सभापति सीपी राधाकृष्णन ने कार्यवाही को जारी रखा तो समूचा विपक्ष वॉकआउट कर गया, जो कि प्रश्न काल में भी नहीं लौटा।

दोपहर दो बजे कार्यवाही फिर शुरू हुई तो पीएमओ में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने पेपर लीक का विधेयक प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि पेपर लीक की घटनाओं से कोई राज्य या दल अछूता नहीं है। इसकी सूची बहुत लंबी है।

जितेंद्र सिंह ने संशोधित विधेयक के कानूनी प्रविधानों का उल्लेख करते हुए कहा कि पारदर्शी परीक्षाओं को लेकर सरकार की जीरो टालरेंस की प्रतिबद्धता है, इसीलिए कानून को सख्त बनाया जा रहा है।

विपक्ष की ओर से चर्चा की शुरुआत की नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने की। उन्होंने कहा कि इस बिल में सिर्फ आंकड़े बदले हैं। इससे सुधार नहीं होगा। फर्क तो इससे पड़ता है कि आप पेपर लीक के बिना परीक्षा कैसे कराते हैं।

खरगे ने आरोप लगाया कि 2024 में बने कानून में बदलाव की मांग तभी कांग्रेस ने की थी, लेकिन सरकार ने इसलिए नहीं मानी, क्योंकि तब राहुल गांधी छात्रों की आवाज देशभर में उठा रहे थे। उन्हें बदलाव का श्रेय मिल सकता था।

नेता प्रतिपक्ष ने सरकार से सवाल पूछे- लाठीचार्ज किसने किया, आंसू गैस किसने छोड़ी, पैलेट गन के इस्तेमाल का आदेश किसने दिया? सादे कपड़ों में छात्रों को पीटने वाले लोग कौन थे? दिल्ली पुलिस किसके अधीन है? सीआरपीएफ की आरएएफ किसके आदेश पर काम करती है? इस पूरे घटनाक्रम का सर्वोच्च सूत्रधार कौन था?

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि देश इन सवालों का जवाब चाहता है। अगर गृह मंत्री इनके जवाब नहीं दे सकते तो उन्हें इस्तीफा देना चाहिए या प्रधानमंत्री उन्हें बर्खास्त करें।

इस दौरान खरगे ने कुछ आपत्तिजनक टिप्पणियां भी कीं, जिन्हें कार्यवाही से निकालने की मांग करते हुए नेता सदन जेपी नड्डा ने खरगे को सलाह दी कि तर्क रखें, भावावेश में न आएं।

'उत्तर प्रदेश से हुई नकल माफिया की शुरुआत'

समाजवादी पार्टी द्वारा सरकार की नीयत पर सवाल उठाए जाने का जवाब चर्चा के दौरान भाजपा सांसद बृजलाल ने दिया। उन्होंने 1992 में उत्तर प्रदेश में कल्याण सिंह सरकार द्वारा लाए गए नकल विरोधी अध्यादेश का उल्लेख किया।

कहा कि उससे पहले एक सरकार में नकल का बोलबाला था। सपा के एक बड़े नेता ने कहा था कि हमारी सरकार आई तो कोई छात्र फेल नहीं होगा।

भाजपा सांसद ने दावा किया कि तब छात्र एक पार्टी के जिंदाबाद के नारे लगाते हुए धुआंधार नकल करते थे। वहीं से नकल माफिया की शुरुआत हुई। नकल के लिए देशभर के छात्र उत्तर प्रदेश में परीक्षा देने आते थे। उत्तर प्रदेश नकल की राजधानी बन गया था।

हालांकि, सपा नेता प्रो. रामगोपाल यादव ने दावा किया कि बृजलाल की 90 प्रतिशत बातें गलत थीं, इसलिए उन्हें गंभीरता से नहीं लेते।

प्रो. यादव ने पार्टी की मांग दोहराई कि नीट को खत्म कर राज्यों को अधिकार दे देना चाहिए। केंद्र अपना 15 सीटों का कोटा रखे। उन्होंने तर्क दिया कि राष्ट्रीय स्तर पर नीट की परीक्षा होने में इतनी जटिलताएं हैं कि शीर्ष पर बैठे व्यक्ति के लिए पेपर लीक रोकना बहुत मुश्किल होगा।

प्रो. यादव ने बृजलाल पर यूं भी टिप्पणी की कि कांग्रेस के समय से ही मुलायम सिंह और सपा का विरोध कर यूपी के नेता दिल्ली में अपनी राजनीति चमकाते रहे हैं।

संजय झा ने की जांच की मांग
चर्चा के दौरान जनता दल (यूनाइटेड) के संजय कुमार झा ने कहा कि इस विषय को राजनीतिक लाभ-हानि के तराजू पर नहीं तौला जाना चाहिए, क्योंकि पेपर लीक की समस्या नई नहीं है। यह एक राष्ट्रीय चुनौती है।

उन्होंने गति दिवस लोकसभा में प्रियंका गांधी वाड्रा द्वारा मद्रास आइआइटी के प्रो. वी. कामाकोटी पर की गई टिप्पणी पर बिना नाम लिए कटाक्ष किया कि जिस खानदान की तीन-चार पीढ़ियों का उच्च शिक्षा से खास नाता नहीं रहा, वह भी आइआइटी मद्रास पर टिप्पणी कर रहे हैं।

साथ ही संजय झा ने दावा किया कि उन्होंने एक मलयाली चैनल पर देखा कि 23 उद्योगपतियों ने टिकट देकर कुछ तत्वों को छात्र आंदोलन में शामिल होने के लिए भेजा।

गृह मंत्री को इसकी जांच करानी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्र आंदोलन को हाईजैक करने का प्रयास हुआ। उनकी टिप्पणी पर विपक्षी सदस्यों ने हंगामा भी किया।

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