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अंटार्कटिका की बर्फ पिघलने से समुद्र का पानी हुआ अधिक खारा, ग्लोबल वार्मिंग का खतरा बढ़ा

Published: Thu, 29 Oct 2026 09:48 AM (IST)

साइंस जर्नल नेचर क्लाइमेट चेंज के एक अध्ययन के अनुसार, 2015 के बाद अंटार्कटिका में समुद्री बर्फ की कमी से महासागरों का पानी अधिक खारा और घना हो रहा है।

अंटार्कटिका में पिघलती बर्फ का असर।

अंटार्कटिका में पिघलती बर्फ का असर।

HighLights

  1. अंटार्कटिका में समुद्री बर्फ पिघलने से महासागर खारे हो रहे हैं।

  2. मीठे पानी का रुझान उलटा, महासागरों की संरचना बिगड़ रही है।

  3. गहरे समुद्र का कार्बन वायुमंडल में, ग्लोबल वार्मिंग तेज होगी।

डिजिटल डेस्क, बेंगलुरु। साइंस जर्नल नेचर क्लाइमेट चेंज में प्रकाशित एक नए अध्ययन में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। साल 2015 के बाद से अंटार्कटिका में समुद्री बर्फ में आई भारी गिरावट के कारण महासागरों के एक बड़े हिस्से में दशकों से चला आ रहा मीठे पानी का रुझान उलट गया है। इसके चलते समुद्र का यह पानी अब अधिक खारा और घना हो रहा है।

वैज्ञानिकों का मानना है कि इस बदलाव से महासागरों की परतदार संरचना बिगड़ सकती है, जिससे गहरे समुद्र में दबा कार्बन आसानी से वायुमंडल में बाहर आ सकता है और ग्लोबल वार्मिंग की रफ्तार और तेज हो सकती है।

किन संस्थानों के वैज्ञानिकों ने किया अध्ययन?

बता दें कि यह महत्वपूर्ण रिसर्च भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc), मेलबर्न विश्वविद्यालय और साउथेम्प्टन विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने मिलकर की है। अध्ययन में 'अंटार्कटिक इंटरमीडिएट वाटर' (AAIW) में आए बदलावों की जांच की गई है। यह पानी दक्षिणी महासागर में बनता है और सतह से सैकड़ों मीटर नीचे बहते हुए उत्तर की ओर अटलांटिक, हिंद और प्रशांत महासागरों तक फैलता है।

IISc के सेंटर फॉर एटमॉस्फेरिक एंड ओसियन साइंसेज (CAOS) के शोध छात्र और इस अध्ययन के मुख्य लेखक कौशिक मिश्रा ने कहा कि के पास होने वाले इन बदलावों का असर दूर-दूर तक, यानी ध्रुवों से बहुत आगे तक महसूस किया जा सकता है।

बर्फ कम होने से कैसे बदल रहा है समुद्र का पानी?

महासागर की इस प्रक्रिया के पीछे समुद्री बर्फ और मीठे पानी का चक्र जुड़ा हुआ है। इस बात को ऐसे समझिए कि हर साल अंटार्कटिका की सर्दियों मई से जुलाई में भारी मात्रा में समुद्री बर्फ बनती है। जैसे-जैसे तापमान बढ़ता है, यह बर्फ पिघलती है और मीठा पानी छोड़ती है, जिससे सतह के पास ठंडे और मीठे पानी की एक परत बनी रहती है।

ऐसे हुई 2015 के बाद बदलाव की शुरुआत

जब समुद्री बर्फ कम होने लगी, तो समुद्र में आने वाले मीठे पानी की मात्रा घट गई। इसके साथ ही समुद्र की गहराइयों से गर्म और खारे पानी का ऊपर आना बढ़ गया। इन दोनों कारणों से AAIW में जाने वाला पानी अब ज्यादा खारा और भारी हो रहा है।

कैसे की गई इस बात की पुष्टि?

गौरतलब है कि शोधकर्ताओं की टीम ने शुरू में हिंद महासागर क्षेत्र में मध्यम गहराई वाले पानी के बहने और मिलने के तौर-तरीकों का अध्ययन करना शुरू किया था। लेकिन जब उन्होंने आंकड़ों की गहराई से जांच की, तो उन्हें अंटार्कटिका की बर्फ और इस पानी में आए बदलावों के बीच गहरा संबंध नजर आया।