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'क्या मैं आतंकवादी हूं', पवन खेड़ा को SC से फिर झटका; अग्रिम जमानत बढ़ाने से इनकार

Published: Fri, 17 Apr 2026 01:14 PM (IST)Updated: Fri, 17 Apr 2026 01:19 PM (IST)

सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की ट्रांजिट बेल अवधि बढ़ाने से इनकार कर दिया है। खेड़ा पर असम ...और पढ़ें

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को लगा झटका। (फाइल फोटो)

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को लगा झटका। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. सुप्रीम कोर्ट ने पवन खेड़ा की ट्रांजिट बेल अवधि बढ़ाने से मना किया।

  2. खेड़ा को अग्रिम जमानत के लिए गुवाहाटी हाई कोर्ट जाने को कहा।

  3. वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत के फैसले पर निराशा जताई।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की ट्रांजिट बेल की अवधि बढ़ाने से इनकार कर दिया है। पवन खेड़ा पर असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी के खिलाफ की गई टिप्पणियों को लेकर पुलिस केस दर्ज है।

जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस चांदुरकर की पीठ ने उनकी याचिका खारिज कर दी, जिसके बाद खेड़ा की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने अफसोस जताते हुए कहा, "क्या यह अदालत मुझे मंगलवार तक सुरक्षा प्रदान नहीं कर सकती... क्या मैं कोई आतंकवादी हूं?"

खेड़ा के वकील ने क्या कहा?

चूंकि अदालत ने उनकी याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया तो खेड़ा की ओर से पेश हुए अभिषेक मनु सिंघवी ने पूछा, "आज शुक्रवार है, मैं सोमवार को याचिका दायर कर रहा हूं। क्या मैं कोई संगीन अपराधी हूं कि मुझे यह राहत भी न दी जाए?"

सुप्रीम कोर्ट ने खेड़ा को दिया ये निर्देश

इसके बजाय, अदालत ने खेड़ा को गुवाहाटी हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर करने का निर्देश दिया। साथ ही पीठ ने हाई कोर्ट से यह भी कहा कि वह इस सुनवाई के दौरान की गई उसकी अपनी टिप्पणियों से प्रभावित न हो।

इसमें यह भी स्पष्ट किया गया कि असम की अदालत खेड़ा के आवेदन पर स्वतंत्र रूप से, रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री और उसके अपने गुण-दोषों के आधार पर निर्णय लेगी और सुप्रीम कोर्ट द्वारा अपने पिछले आदेश में की गई किसी भी टिप्पणी से प्रभावित नहीं होगी।

फर्जी आधार को लेकर क्या कहा?

उन्होंने आगे यह तर्क दिया कि तेलंगाना हाई कोर्ट के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा 15 अप्रैल को लगाई गई रोक खेड़ा द्वारा जमा किए गए दस्तावेजों को लेकर हुई एक गलतफहमी के आधार पर हासिल की गई थी।

सॉलिसिटर जनरल के इस तर्क का जिक्र करते हुए कि हाई कोर्ट से राहत एक जाली आधार दस्तावेज का इस्तेमाल करके हासिल की गई थी, सिंघवी ने कहा कि दस्तावेज जमा करने की जल्दबाजी के कारण कुछ गड़बड़ी हो गई थी और बाद में अतिरिक्त दस्तावेजों के साथ हाई कोर्ट के सामने इस गलती को स्पष्ट कर दिया गया था।

खेड़ा ने क्या मांग की थी?

खेड़ा ने अपनी ट्रांजिट अग्रिम जमानत की अवधि मंगलवार तक बढ़ाने की मांग की थी, यह तर्क देते हुए कि असम की अदालतें इस समय बंद हैं। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस अनुरोध को अस्वीकार कर दिया और निर्देश दिया कि अग्रिम जमानत के लिए कोई भी याचिका बिना किसी देरी के असम की संबंधित अदालत में दायर की जाए।

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