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आंध्र प्रदेश में सहकारी चीनी मिलों के निजीकरण पर भड़की YSRCP, TDP सरकार से की फैसले वापस लेने की मांग

Published: Sun, 27 Sep 2026 11:49 PM (IST)

युवाजन श्रमिक रायतू कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) ने आंध्र प्रदेश में तेदेपा-नीत गठबंधन सरकार द्वारा सहकारी क्षेत्र की चीनी मिलों के मुद्रीकरण और बिक्री के निर्णय का कड़ा विरोध किया है।

सहकारी चीनी मिलों के निजीकरण का विरोध (यह तस्वीर AI द्वारा जनरेट की गई है।)

सहकारी चीनी मिलों के निजीकरण का विरोध (यह तस्वीर AI द्वारा जनरेट की गई है।)

HighLights

  1. वाईएसआरसीपी ने आंध्र प्रदेश में सहकारी चीनी मिलों की बिक्री का विरोध किया।

  2. तेदेपा सरकार पर 3000 करोड़ के भूमि बैंक पर कब्जे का आरोप।

  3. गोवाड़ा मिल तुरंत शुरू करने और किसानों का बकाया चुकाने की मांग।

डिजिटल डेस्क, अमरावती। युवाजन श्रमिक रायतू कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) ने आंध्र प्रदेश की तेदेपा-नीत गठबंधन सरकार द्वारा सहकारी क्षेत्र की चीनी मिलों का मुद्रीकरण करने और उनकी संपत्ति बेचने के निर्णय का कड़ा विरोध किया है।

पार्टी ने स्पष्ट किया है कि वह चीनी मिलों को बेचने की अनुमति नहीं देगी। उसने सरकार से इस फैसले को तुरंत वापस लेने की मांग की है।

पार्टी नेताओं, पूर्व मंत्री गुडीवाड़ा अमरनाथ और पूर्व विधायक धर्मश्री ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू निजीकरण के पक्षधर हैं। कैबिनेट के इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य पूरे राज्य में तीन हजार करोड़ रुपये मूल्य के 770 एकड़ भूमि बैंक पर कब्जा करना है।

उन्होंने बताया कि गोवाड़ा चीनी मिल एक चालू मिल है, जिस पर लगभग 25 हजार किसान निर्भर हैं। सरकार पर गन्ना किसानों के 30 करोड़ और कर्मचारियों के पांच करोड़ रुपये बकाया हैं।

वाईएसआरसीपी ने 29 सितंबर को इस निजीकरण और बकाये के भुगतान के खिलाफ विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है। इसके बाद सरकार ने बकाया चुकाने की बात तो कही, लेकिन शर्त रखी कि यह भुगतान मिल की संपत्तियों की बिक्री से प्राप्त आय से किया जाएगा, जिसे पार्टी ने "अस्वीकार्य" करार दिया है।

वाईएसआरसीपी ने गोवाड़ा मिल को तुरंत फिर से शुरू करने और सार्वजनिक संपत्तियों को बेचना बंद करने की मांग की है। (समाचार एजेंसी ANI के इनपुट के साथ)