साहिबगंज, [राजेन्द्र पाठक]। अमूमन एक साथ दोनों हाथों से कोई एक ही काम करना बेहद मुश्किल होता है। पर, साहिबगंज का एक शख्स ऐसा है जो अपने हाथों के साथ पैरों का भी इस्तेमाल पेंटिंग्स बनाने में करता है। अचरज से भरा यह कारनामा पेशे से शिक्षक और शहर के बंगालीटोला निवासी विप्लव राय चौधरी कर रहे हैं। वे एक साथ दोनों हाथ व पैरों का इस्तेमाल कर पेंटिंग बनाते हैं। उनके हुनर को जो भी देखता है उनकी प्रतिभा का कायल हो जाता है। लोगों का यहां तक कहना है कि भाई इनके हाथ पैरों में तो जादू है।

कुछ अलग करने की चाह ने दिखाई राह

विप्लव को बचपन से ही कुछ अलग करने की चाह थी। उनके बड़े भाई अभिजीत को पेंटिग्‍स बनाने का शौक था। वे उन्‍हें बचपन से देखा करते थे। पांच साल की उम्र में ऐसी ललक जागी कि चित्रकला के वे दीवाने हो गए। जब कुछ बड़े हुए तो सोचा कि हाथ से ही क्यों पैरों का भी प्रयोग पेंटिंग बनाने में किया जाए। यह तो अलग ही विधा हो जाएगी। इस हुनर को तराशने के लिए शुरू कर दिया अभ्यास। कुछ दिनों में मेहनत रंग लाई और वे हाथ-पैरों के प्रयोग से एक से एक चित्र बनाने लगे।

फाइन आर्ट्स में किया डिप्लोमा

विप्लव ने विज्ञान वर्ग से पढ़ाई की। पर, अपनी कला को निखारने और उसकी बारीकियां जानने के लिए रवीन्द्र भारती संस्थान कोलकाता में प्रवेश लिया। यहां से उन्होंने फाइन आर्ट्स में डिप्लोमा किया। अभी वे साहिबगंज के संत जेवियर्स स्कूल में बतौर विज्ञान शिक्षक काम कर रहे हैं। इसके अलावा बच्चों को चित्रकला भी पढ़ाते हैं। अपने घर में 50 बच्चों की क्‍लास लगाकर उनको पेंटिग्स की बारीकियां सिखाते हैं।

अपने हुनर से समाज को जगा रहे विप्लव

विप्लव अपने हुनर का प्रयोग समाज को जगाने के लिए कर रहे हैं। वे कहते हैं कि पेटिंग्‍स के प्रति लोगों का आकर्षण होता है। इनके रंग व अंदाज बोलते हैं और संदेश भी देते हैं। इसके माध्यम से दिया गया संदेश सभी पर गहरा असर करता है। इसी बात को ध्यान में रखकर बेटियों की शिक्षा, बेटी बचाओ, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, वन संरक्षण, गंगा सफाई, जीएसटी के लाभ-हानि जैसे मुद्दों पर लोगों को जागरुक कर रहे हैं।

विप्लव को मिले कई सम्मान

विप्लव को पेंटिंग्स बनाने के लिए वर्ष 2006, 2007, 2008 व 2011 में चार बार राजीव गांधी नेशनल अवॉर्ड से सम्मानित किया जा चुका है। वर्ष 2009 में उन्हें दिल्ली में इंदिरा गांधी नेशनल अवॉर्ड से सम्मानित किया है। विप्लव को वर्ष 2008 में स्टूडेंट डेवलपमेंट सोसाइटी पुणे की ओर से आइडियल टीचर अवॉर्ड मिला। वर्ष 2009 में त्रिपुरा आर्ट सोसाइटी ने सम्मानित किया। वर्ष 2010 में दिल्ली में नेहरू पेंटिंग्स ग्रुप ऑफ इंटरनेशनल अवॉर्ड से नवाजे गए। वर्ष 2012 में एकेडमी ऑफ आर्ट यूनिवर्सिटी एवं वर्ष 2011 में झारखंड स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन ने उनको सम्मानित किया।

पीएम मोदी के आगमन पर शहर को सजाने में निभाई थी भूमिका

वर्ष 2016 में साहिबगंज में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आगमन हुआ था। उस दौरान शहर को पेंटिंग्स से सजाया गया था। विप्लव ने अपनी पेंटिंग्स से शहर को सुसज्जित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। जिला प्रशासन ने भी विप्लव को सम्मानित किया है।

हुनर तराशने को एक और कदम, पेंटिंग बनाने में मुंह का भी इस्तेमाल

विप्लव कुछ समय से दोनों हाथ व पैर के साथ पेंटिंग बनाने में मुंह का भी प्रयोग कर रहे हैं। उनका कहना है कि जल्द ही अभ्यास के दम पर इसमें भी पारंगत हो जाएंगे। इस क्षेत्र में अभी बहुत कुछ करना है।

विप्लव की पेंटिग्स का जर्मनी में डंका

विप्लव की बनाई छह पेंटिंग्स को जर्मनी ले जाया गया है। वहां भी लोगों ने इनकी कला की सराहना की है। उनकी पेंटिंग्स रांची के झारखंड क्रिकेट स्टेडियम, साहिबगंज में उपायुक्त कार्यालय सभागार, विकास भवन, डीइओ कार्यालय के अलावा त्रिपुरा के कई स्थानों में लगाई गई हैं।

Posted By: Digpal Singh