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'भविष्य का रास्ता बेहतर...', भारत-US ट्रेड डील को लेकर किसानों की चिंताओं पर क्या बोले अमूल के MD?

Published: Mon, 09 Feb 2026 08:07 AM (IST)

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर किसानों की चिंताएं बढ़ गई हैं, उन्हें सस्ते अमेरिकी उत्पादों का डर है। हालांकि, अमूल ...और पढ़ें

अमूल के एमडी जयेन मेहता। (फाइल फोटो)

अमूल के एमडी जयेन मेहता। (फाइल फोटो)

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर देश के किसानों में काफी चिंता पैदा हो गई है। किसानों को लगता है कि देश में आने वाले सस्ते अमेरिकी प्रोडक्ट्स उनकी मुश्किलों को और बढ़ा देंगे। हालांकि, डेयरी सेक्टर का मानना है कि ये चिंताएं शायद गलत हैं।

एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, अमूल के मैनेजिंग डायरेक्टर जयेन मेहता ने कहा कि यह समझौता किसानों और कृषि क्षेत्र की अच्छी तरह से प्रोटेक्ट करता है और उन्हें अमेरिकी बाजार तक पहुंच भी देता है।

'बनेगा बेहतर भविष्य का रास्ता'

उन्होंने आगे कहा, "बड़े मार्केट तक पहुंच पाने के लिए बातचीत जरूरी थी और इस डील से वह हो गया है। इससे भी जरूरी बात यह है कि टैरिफ भी 50 से घटकर 18 परसेंट हो गए हैं, जिससे भारतीय प्रोडक्ट्स को उन मार्केट में बेहतर एक्सेस मिलेगा और इस सेक्टर से जुड़े सभी लोगों के लिए एक बेहतर भविष्य का रास्ता बनेगा।"

डेयरी सेक्टर को लेकर और क्या बोले जयन मेहता?

अमूल के एमडी कहा, "डेयरी इंडस्ट्री और पशुधन सेक्टर के सबसे जरूरी पहलुओं में से एक पशुओं का चारा है।" उन्होंने अमूल का उदाहरण देते हुए कहा कि यह गुजरात के 18,600 गांवों में 36 लाख किसानों के साथ काम करता है और हर दिन लगभग 350 लाख लीटर दूध इकट्ठा और मैनेज करता है।

उन्होंने कहा कि अमूल को जिन चीजों की जरूरत है, उनमें से एक है अच्छी क्वालिटी का पशु आहार देना। इसमें अलग-अलग तरह की खेती से मिलने वाली चीजों का कॉम्बिनेशन हो। मसलन डी-ऑयल राइस ब्रान, जो धान के छिलके से तेल निकालने के बाद मिलता है, मक्का, रेपसीड एक्सट्रैक्शन और गुड़।

'कम इस्तेमाल होने वाली चीजों को इंपोर्ट नहीं कर रहा भारत'

उन्होंने कहा, "अमूल में हमारे पास लगभग 8 प्लांट हैं जो हर दिन करीब 12,000 टन पशु चारा बनाते हैं।" उन्होंने कहा कि यहां भी भारत ऐसी चीजें इंपोर्ट नहीं कर रहा है जिनका ज्यादा इस्तेमाल नहीं होता। उन्होंने DDGS (डिस्टिलर्स ड्राइड ग्रेन्स विद सॉल्युबल्स) का उदाहरण दिया, जिसका इस्तेमाल पशु चारे में बहुत कम होता है।

उन्होंने ब, "भारत में भी डीडीजीएस बहुत ज्यादा मात्रा में उपलब्ध है क्योंकि हमने मक्के से इथेनॉल बनाना शुरू कर दिया है। लेकिन आप इसमें 3 से 4% से ज्यादा इसका इस्तेमाल नहीं कर सकते। इसलिए, फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के तहत उस चीज के देश में आने का कोई प्रैक्टिकल फायदा नहीं है।"

'चिंता की कोई बात नहीं'

उन्होंने आगे कहा, "इसलिए, असल में पशु आहार सेक्टर, डेयरी सेक्टर और कृषि सेक्टर के लिए चिंता की कोई बात नहीं है। जैसा कि हाल ही में व्यापार बातचीत में घोषणा की गई है।"

बता दें कि देश के किसान संगठनों ने संयुक्त किसान मोर्चा और अखिल भारतीय किसान सभा की अगुवाई में 12 फरवरी को एक दिन की हड़ताल का एलान किया है।

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