देहरादून [जागरण ब्यूरो]। उत्तराखंड में सरकार बचाने की कोशिश में जुटे मुख्यमंत्री हरीश रावत ने आखिरकार अमृता रावत को मंत्रिमंडल से बर्खास्त कर दिया। कांग्रेस को झटका देकर भाजपा में गए सतपाल महाराज की पत्‍‌नी अमृता को हटाने के साथ ही सरकार को समर्थन दे रहे और मंत्रिमंडल में स्थान नहीं मिलने से खफा निर्दलीय विधायक दिनेश धनै को मंत्री बनाया गया है। सोमवार को राजभवन में राज्यपाल डॉ. अजीज कुरैशी ने धनै को मंत्री पद की शपथ दिलाई। धनै को अभी महकमे नहीं दिए गए हैं।

लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद पस्तहाल सरकार को बचाने की कवायद में मुख्यमंत्री पार्टी के भीतर और सरकार को समर्थन देने वाले बसपा, उक्रांद और निर्दलीय विधायकों को साधने में लगे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा और सतपाल महाराज समर्थक विधायकों को संसदीय सचिवों की जिम्मेदारी देने के तुरंत बाद वरिष्ठ मंत्री इंदिरा हृदयेश समेत दो मंत्रियों को अतिरिक्त महकमे बांट दिए गए। अगले ही दिन मुख्यमंत्री ने और दस विधायकों को सरकारी ओहदों से नवाजने में देर नहीं लगाई। इस कड़ी में सोमवार को मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सरकार पर लगातार हमले बोल रहे सतपाल महाराज पर परोक्ष प्रहार करते हुए उनकी पत्‍‌नी अमृता रावत को मंत्रिमंडल से बर्खास्त कर दिया। महाराज के भाजपा में जाने के बाद से पार्टी के भीतर अमृता रावत को मंत्रिमंडल से हटाने को विधायक और नेता दबाव बनाए हुए थे। मुख्यमंत्री खुद भी अमृता रावत से इस्तीफा मांग चुके थे लेकिन अमृता खुद इस्तीफा देने को राजी नहीं हुई।

हरीश रावत दें इस्तीफा : अमृता

देहरादून। विधायक अमृता रावत ने मंत्रिमंडल सें निकालने को विनाश काले विपरीत बुद्धि करार देते हुए इसके औचित्य पर सवाल दागे हैं। नई दिल्ली से जारी बयान में उन्होंने कहा कि इस्तीफा नहीं देने के बावजूद उन्हें किस आधार पर हटाया गया, मुख्यमंत्री को इसका जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में तीन सीटें जिताकर देने का वादा कर मुख्यमंत्री बने हरीश रावत को एक भी सीट नहीं जिताने पर नैतिकता के आधार पर इस्तीफा देना चाहिए। अमृता ने नई दिल्ली में कांग्रेस के बड़े नेताओं से मुलाकात का वक्त मांगा है।

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