स्पीकर बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव खारिज, शाह का राहुल गांधी पर तंज: 'आंख मारने वाले भी सवाल उठा रहे'
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव को दुर्भाग्यपूर्ण बताया।
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अमित शाह ने स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर टिप्पणी की

समय कम है?
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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष का अविश्वास प्रस्ताव असफल रहा, लेकिन इससे पहले आज निचले सदन में जमकर हंगामा हुआ। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर की गई टिप्पणी के बाद विपक्षी सांसदों ने जमकर हंगामा किया।
इससे पहले लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष के नो-कॉन्फिडेंस मोशन पर, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, 'यह कोई आम बात नहीं है। करीब 4 दशक बाद, लोकसभा स्पीकर के खिलाफ नो-कॉन्फिडेंस मोशन लाया गया है। यह पार्लियामेंट्री पॉलिटिक्स और इस सदन के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है।'

विपक्ष इमानदारी पर उठा रही सवाल
शुरूआती दिनों को याद करते हुए गृह मंत्री बोले, 'मैं पूरे सदन को बताना चाहता हूं कि विद्यमान स्पीकर की नियुक्ति जब हुई, तब दोनों दलों के नेता ने एक साथ उन्हें आसन पर बैठाने का काम किया। इसका मतलब है कि स्पीकर को अपने दायित्वों के निर्वहन के लिए पक्ष और प्रतिपक्ष दोनों ने एक प्रकार से मुक्त माहौल भी देना है और दायित्वों के निर्वहन के लिए उनका समर्थन भी करना है।
मगर आज स्पीकर के निर्णय पर कोई असहमति तो व्यक्त हो सकती है, लेकिन लोकसभा के नियमों में स्पीकर के निर्णयों को अंतिम माना गया है। इसके विपरित विपक्ष ने स्पीकर की निष्ठा पर सवालिया निशान खड़ा किया। ये लोकसभा भारत के लोकतंत्र की सबसे बड़ी पंचायत है, और न केवल भारत, बल्कि दुनियाभर में हमारी लोकतंत्र की साख बनी है, गरिमा बनी है... और पूरी दुनिया लोकतंत्र की इस प्रतिष्ठा को स्वीकार करती है।लेकिन जब इस पंचायत के मुखिया पर, उसकी निष्ठा पर सवालिया निशान लगता है तो केवल देश में नहीं, पूरी दुनिया में हमारी लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल खड़ा होता है। लेकिन यहां उनपर शंका के सवाल उठा दिए।

सदन आपसी विश्वास पर चलता है: शाह
अमित शाह बोले, 'मैं बताना चाहता हूं कि 75 साल से इन दोनों सदनों ने हमारे लोकतंत्र की नींव को पाताल से भी गहरा किया है, लेकिन आज विपक्ष ने इस साख पर एक प्रकार से सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। सदन आपसी विश्वास से चलता है।
पक्ष और विपक्ष—दोनों के लिए सदन के जो स्पीकर होते हैं, वे कस्टोडियन होते हैं। इसलिए नियम बनाए गए हैं। यह सदन कोई मेला नहीं है; यहां नियमों के अनुसार चलना पड़ता है। जो बातें सदन के नियम परमिट नहीं करते, उस तरह से बोलने का किसी को अधिकार नहीं है, चाहे वह कोई भी हो।'
अमित शाह ने कहा कि किसी के एडवाइजर एक्टिविस्ट हो सकते हैं, किसी के एडवाइजर आंदोलनकारी हो सकते हैं, मगर आंदोलन और एक्टिविस्ट को सदन में सदन के नियमों के अनुसार ही चलना पडे़गा, क्योंकि यहां नियम बनाए गए हैं। मैं बताना चाहता हूं कि आप अधिकार का संरक्षण कर सकते हैं, लेकिन विशेषाधिकार के मुगालते में जो लोग जीते हैं उनको उनकी पार्टी और जनता भी संरक्षण नहीं देती है... इसलिए वो छोटे होते जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि पहले जो तीन बार प्रस्ताव आया था, वो तब आया जब कांग्रेस पार्टी सत्ता में थी, लेकिन हम कभी नहीं लाए। तीनों बार ये परंपरा रही कि जब स्पीकर पर अविश्वास प्रस्ताव की चर्चा होगी तब इस स्थान पर स्पीकर साहब स्थान ग्रहण नहीं करेंगे। लेकिन ओम बिरला जी एकमात्र स्पीकर ऐसे हैं, जिन्होंने मोरल ग्राउंड पर जब से इन्होंने उन्हें नामित किया, तब से वो नहीं आए हैं।
संसद में 30 साल हो गए: शाह
गृह मंत्री ने कहा कि मुझे विधायक, सांसद रहते हुए लगभग 30 साल हो गए, लेकिन रात के 12 बजे तक सदस्यों को शून्यकाल उठाने का मौका हमारे लोकसभा स्पीकर साहब ने दिया है, ऐसा मैंने कभी नहीं देखा। लेकिन ये कहते हैं कि उन्हें मौका ही नहीं मिलता है। 2019 में रिकॉर्ड 78 महिलाएं संसद में चुनकर आईं, सभी महिला सांसदों को बोलने का अधिकार हमने स्पीकर साहब बिरला जी ने दिया। बिरला जी के आग्रह से सदन के अंदर क्षेत्रीय भाषाओं का उपयोग भी बढ़ा और लगभग 14 भाषाओं में यहां भाषण दिया गया।
कांग्रेस पार्टी को मैं बताना चाहता हूं कि 17वीं लोकसभा में कांग्रेस पार्टी को 157 घंटे और 55 मिनट का समय दिया गया, जबकि उनके 52 सदस्य थे। इसकी तुलना में बीजेपी को 349 घंटे और 8 मिनट दिए गए, जबकि हमारी सदस्य संख्या 303 थी। इस प्रकार बीजेपी से कांग्रेस पार्टी को 6 गुना अधिक समय देने का काम स्पीकर साहब ने किया है।
इसी प्रकार 18वीं लोकसभा में कांग्रेस पार्टी द्वारा कल तक 71 घंटे बोला गया, जबकि उनके पास 99 सदस्य हैं। जबकि भारतीय जनता पार्टी को 122 घंटे मिले हैं, जबकि हमारे 239 सदस्य हैं। इसमें भी कांग्रेस पार्टी को भाजपा से दोगुना समय मिला। लेकिन ये कहते हैं कि हमें बोलने का मौका नहीं दिया गया... बोलने के समय तो इनके नेता जर्मनी और इंग्लैंड होते हैं।
राहुल पर हमले के बाद जोरदार हंगामा
अमित शाह के भाषण के दौरान छिटपुट विरोध प्रदर्शन होते रहे, लेकिन जैसे ही शाह ने राहुल गांधी पर हमले किए विपक्ष का विरोध प्रदर्शन उग्र हो गया। सदस्य सदन के वेल में जमा हो गए और नारे लगाने लगे, जिसके बाद अध्यक्ष पद पर बैठे जगदंबिका पाल ने मतदान की घोषणा कर दिन की कार्यवाही खत्म कर दी।
