नई दिल्‍ली, एएनआइ। पूर्वी लद्दाख में चीन से जारी तनाव के मद्देनजर नौसेना के शीर्ष कमांडरों (Navy commanders) की बुधवार को एक बड़ी बैठक होगी। बैठक में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी नेवी (People Liberation Army Navy, PLAN) की गतिविधियों से निपटने की तैयारियों पर चर्चा होगी। यह बैठक ऐसे वक्‍त में हो रही है जब चीन सीमा पर तैनाती बढ़ा रहा है और पूर्वी लद्दाख क्षेत्र (Eastern Ladakh sector) में फिंगर इलाके (Finger area), डेपसांग (Depsang) और गोगरा (Gogra) से पीछे हटने में आनाकानी कर रहा है। यही नहीं नौसेना ने चीनी नौसेना की हरकतों पर नजर रखने के लिए युद्धपोतों की तैनाती भी बढ़ा दी है।

नौसेना के सूत्रों ने बताया कि नौसेना के शीर्ष अधिकारी इस बैठक में शिरकत करेंगे। भारतीय नौसेना के अधिकारी इस बैठक में चीनी आक्रामकता और हिंद महासागर क्षेत्र में भारतीय नौसेना द्वारा उठाए जाने वाले जरूरी कदमों पर विस्तार से चर्चा करेंगे। इस बैठक में नौसेना प्रमुख भी शामिल होंगे। इसमें पश्चिमी नौसेना कमांडर (Western Navy Commander) वाइस एडमिरल अजीत कुमार (Vice Admiral Ajit Kumar) और पूर्वी नौसेना कमांडर (Eastern Naval commander) वाइस एडमिरल अतुल जैन (Vice Admiral Atul Jain) सहित महत्वपूर्ण कमांडर भाग लेंगे।

समाचार एजेंसी एएनआइ के मुताबिक, नौसेना चीन की चुनौती से निपटने के लिए मिशन आधारित तैनाती समेत पीएलएएन की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए विशेष उपाय कर रही है। सूत्रों ने बताया कि नौसेना हिंद महासागर क्षेत्र में मलक्का जलडमरूमध्य से पीएलएएन की आवाजाही पर कड़ी नजर रखने के लिए ड्रोनों और पन‍डुब्बियों की तैनाती की योजना पर काम कर रही है। इसके लिए जरूरी सैन्‍य हथियारों को हासिल करने की भी योजना है। नौसेना जिबूती क्षेत्र के आसपास मौजूद चीनी जहाजों की लगातार निगरानी कर रही है।

सूत्रों ने बताया कि नौसेना ने वायुसेना के एक महत्वपूर्ण अड्डे पर अपने मिग-29 K लड़ाकू विमानों (MiG-29K fighter aircraft) को भी तैनात किया है। इस बेस से लड़ाकू विमान जमीन और पहाड़ी इलाकों में ऑपरेशनों का अभ्यास कर रहे हैं। यही नहीं नौसेना ने 1,245 करोड़ रुपये से अधिक के सौदे के तहत 10 नौसैनिक ड्रोनों (Naval Shipborne Unmanned Aerial Vehicles) की खरीद पर भी तेजी से काम शुरू किया है। भारतीय नौसेना ने हिंद महासागर क्षेत्र में अपने युद्धपोतों की संख्या भी बढ़ा दी है। नौसेना उत्तर में लद्दाख से लेकर दक्षिण में मॉरीशस तक करीब 7,000 किलोमीटर और पश्चिम में लाल सागर से पूर्व में मलक्का जलडमरूमध्य तक करीब 8,000 किलोमीटर की दूरी तक निगरानी रख रही है। 

Edited By: Krishna Bihari Singh