यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 10, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Amarnath Yatra: 10 जुलाई 2017 का वो काला दिन जब पवित्र यात्रा पर हुआ आतंकी हमला, 7 शिव भक्तों ने गंवाई थी जान
अमरनाथ यात्रा एक वार्षिक तीर्थयात्रा है जो भक्तों को हिमालय में स्थित अमरनाथ गुफा तक ले जाती है। यह हिंदू ...और पढ़ें

HighLights
- देश के इतिहास में काला अध्याय 10 जुलाई 2017 का दिन
- आतंकी हमले में सात शिव भक्तों ने गंवाई थी जान
- हमले में मारे गए ज्यादातर तीर्थयात्री देश के गुजरात राज्य से थे
नई दिल्ली, अमित सिंह: भोले की पवित्र गुफा के दर्शन कर अपने घरों की ओर लौट चले उन सात लोगों को नहीं मालूम था कि यह उनकी आखिरी यात्रा होगी।
- 10 जुलाई, 2017 दिन सोमवार भोले के भक्तों से भरी बस अपने गंतव्य की ओर बढ़ रही थी।
- तभी रात के करीब 8 बजकर 20 मिनट पर पहले से घात लगाए बैठे आतंकियों ने बटेंगू के पास बस पर हमला कर दिया।
- जिस वक्त यह हमला हुआ, तब बस में करीब 60-70 भोले भक्त सवार थे। सभी बालटाल से जम्मू लौट रहे थे।
- बटेंगू श्रीनगर से 65 किमी दक्षिण में स्थित है। ज्यादातर तीर्थयात्री देश के राज्य गुजरात से थे।
अमरनाथ यात्रा पर आतंकी हमले की दुखद घटना ने देश को अंदर तक झकझोर कर रख दिया। जम्मू-कश्मीर में लाखों हिंदुओं की पूजनीय पवित्र अमरनाथ यात्रा को आतंकवादियों ने निशाना बनाया। हमले को कायरतापूर्ण बताते हुए देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तभी साफ कर दिया था कि भारत ऐसे हमलों और नफरत के मंसूबों से डरने वाला नहीं है।
अमरनाथ यात्रा की महत्ता
अमरनाथ यात्रा एक वार्षिक तीर्थयात्रा है जो शिव भक्तों को हिमालय में स्थित अमरनाथ गुफा के दर्शनों का मौका देती है। यह हिंदू धर्म में सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक यात्राओं में से एक है, जो हर साल हजारों तीर्थयात्रियों को आकर्षित करती है। श्रद्धालु भगवान शिव से आशीर्वाद लेने के लिए हिमालय की भीषण ठंड का सामना करते हुए दुर्गम इलाकों से होकर गुजरते हैं।
ऐसी मान्यता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से इस पवित्र गुफा में बने शिवलिंग का दर्शन करता है, उसे मोक्ष मिलता है। हिंदू वेद-पुराणों के मुताबिक, काशी में लिंग दर्शन और पूजन से दस गुना, प्रयाग से सौ गुना और नैमिषारण्य तीर्थ से हजार गुना अधिक पुण्य बाबा अमरनाथ के दर्शन से मिलता है।
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10 जुलाई, 2017 का वो हमला
10 जुलाई, 2017 की मनहूस शाम को अमरनाथ गुफा से लौट रहे तीर्थयात्रियों की एक बस पर आतंकवादियों ने हमला कर दिया था। यह घटना जम्मू-कश्मीर के दक्षिणी हिस्से में अनंतनाग के पास हुई। असॉल्ट राइफलों से लैस हमलावरों ने अंधाधुंध गोलियां चलाईं, जिससे यात्री असहाय हो गए। हिंसा की इस भीषण घटना में सात तीर्थयात्रियों की जान चली गई और कई अन्य घायल हुए।
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देश में शोक की लहर
हमले की खबर फैलते ही पूरा देश शोक में डूब गया। इस जघन्य कृत्य की निंदा करते हुए देश के सभी नागरिकों ने अपनी संवेदना व्यक्त की। वहीं, सुरक्षा बलों ने आतंकियों की धर-पकड़ के लिए बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान शुरू किया। केंद्र ने अमरनाथ हमले में मारे गए लोगों के परिजनों को 7 लाख रुपये और घायलों को 1-1 लाख रुपये मुआवजा देने की भी घोषणा की थी।
हमले की जांच-पड़ताल
अमरनाथ यात्रा पर हुए आतंकी हमले की जांच से पता चला था कि इसे पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) ने अंजाम दिया था। इस हमले को क्षेत्र को अस्थिर करने और सांप्रदायिक तनाव पैदा करने के प्रयास के रूप में देखा गया। भारत सरकार ने ऐसे आतंकवादी समूहों के लिए पाकिस्तान के समर्थन की निंदा की और सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई का भी आह्वान किया।
त्रासदी में देश हुआ एकजुट
इस त्रासदी के वक्त, पूरे देश ने एकता का सजीव उदहारण पेश किया। समाज के सभी क्षेत्रों के लोग प्रभावित परिवारों की सहायता के लिए एक साथ खड़े हुए। इस हमले ने आतंकवाद से लड़ने और अपने नागरिकों के जीवन की रक्षा करने के सरकार और सुरक्षा बलों के संकल्प को और मजबूत किया।
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सुरक्षा के उन्नत उपाय
अमरनाथ यात्रा पर हुए आतंकी हमले ने तीर्थयात्रियों की सुरक्षा को लेकर पुनर्मूल्यांकन के लिए प्रेरित किया। सरकार ने यात्रा मार्ग पर सुरक्षा मजबूत करने के लिए त्वरित कार्रवाई की और तीर्थयात्रियों के लिए कड़ी जांच प्रक्रियाएं लागू कीं। इसने भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए बेहतर खुफिया समन्वय और निगरानी बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
शांति के लिए एक आह्वान
अमरनाथ यात्रा पर हुए हमले ने भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में शांति और सद्भाव बनाए रखने के महत्व पर प्रकाश डाला। इसने एक अनुस्मारक के रूप में कार्य किया कि आतंकवाद लोगों को विभाजित करना और देश की एकता को कमजोर करना चाहता है। नागरिक, धार्मिक नेता और राजनीतिकों ने शांति के आह्वान में एकजुट हुए और सभी समुदायों से हिंसा और नफरत की ताकतों के खिलाफ एक साथ खड़े होने का आग्रह किया।
देश के इतिहास में काला अध्याय
2017 की अमरनाथ यात्रा पर हुआ आतंकवादी हमला देश के इतिहास में एक काले अध्याय के रूप में अंकित है। यह घटना आतंकवाद से पैदा होने वाली चुनौतियों और मजबूत सुरक्षा उपायों की आवश्यकता की याद दिलाती है। हालांकि, इसने विपरीत परिस्थितियों में भारतीयों की एकता को भी उजागर किया। इस हमले ने आतंकवाद से लड़ने के साथ शांतिपूर्ण और सामंजस्यपूर्ण समाज की दिशा में काम करने के संकल्प को और मजबूत किया।
