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अल-नीनो का डबल अटैक: खरीफ के बाद अब रबी फसलों पर भी खतरा, क्या महंगे हो जाएंगे दाल-चावल?

Published: Mon, 28 Sep 2026 09:52 PM (IST)Updated: Mon, 28 Sep 2026 10:25 PM (IST)

अल-नीनो के कारण अब रबी की फसलें भी प्रभावित होने की आशंका है, कृषि सचिव आतिश चंद्रा ने कम बारिश वाले राज्यों में चुनौतियों की बात कही।

अल-नीनो का रबी फसलों पर भी खतरा (यह तस्वीर AI की मदद से बनाई गई है।)

अल-नीनो का रबी फसलों पर भी खतरा (यह तस्वीर AI की मदद से बनाई गई है।)

HighLights

  1. अल-नीनो के कारण अब रबी की फसलें भी प्रभावित हो सकती हैं।

  2. कृषि सचिव आतिश चंद्रा ने कम बारिश वाले राज्यों में चिंता जताई।

  3. अनाज उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका, 2026-27 में अल-नीनो मजबूत।

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली । अल-नीनो के कारण अब रबी की फसल के प्रभावित होने की आशंका जताई जाने लगी है। सोमवार को कृषि सचिव आतिश चंद्रा ने कहा कि अल-नीनो के कारण कम बारिश वाले राज्यों में रबी की फसल प्रभावित हो सकती है।

रबी फसल की तैयारी को लेकर सोमवार को आयोजित एक सम्मेलन में चंद्रा ने कहा कि अल-नीनो के कारण कम बारिश वाले राज्यों में खरीफ की फसल भी चुनौतीपूर्ण थी और अब इन इलाकों में रबी की फसल भी चुनौतीपूर्ण रहने वाली है। इससे अनाज उत्पादन पर असर होगा।

अल-नीनो के कारण कम बारिश वाले राज्यों में पहले बुवाई तो बाद में फसल के सुरक्षित रहने की चुनौती थी। गेहूं, तिलहन, चना जैसी फसल रबी के दौरान बोए जाते हैं।

इंटरनेशनल रिसर्च इंस्टीट्यूट फार क्लाइमेट एंड सोसायटी (आईआरआई) के ताजा रिपोर्ट के अनुसार, 2026 के आखिर और 2027 के आरंभ में अल-नीनो के काफी मजबूत रहने की आशंका है। हालांकि, कुल मिलाकर खरीफ पर अल नीनो का असर सीमित रह गया। सम्मेलन में फसल की विविधता पर ध्यान देने पर जोर दिया गया।

चंद्रा के अनुसार, रबी की बुवाई सामान्य तौर पर 638 लाख हेक्टेयर में होती है। इनमें से 300 लाख हेक्टेयर से अधिक में गेहूं की बुवाई होती है। इस दौरान 140 लाख हेक्टेयर में दाल तो 87 लाख हेक्टेयर में तिलहन की खेती की जाती है। लगभग 55 लाख हेक्टेयर में अन्य मोटे अनाज का उत्पादन किया जाता है।

प्रेट्र के अनुसार, चंद्रा ने कहा कि कुछ राज्यों को मिट्टी में अत्यधिक नमी की समस्या का सामना करना पड़ सकता है, जबकि कम बारिश वाले क्षेत्रों में लंबे समय तक नमी की कमी का असर रह सकता है।

रबी सत्र के लिए इसी के अनुरूप रणनीति तैयार करने की जरूरत है। जलवायु परिवर्तन को वास्तविकता बताते हुए उन्होंने कहा कि सिंचाई वाले क्षेत्रों में भी कई जगह बेमौसम भारी बारिश हुई है, जिससे फसलों को नुकसान पहुंचा है।

चंद्रा ने कहा कि हम सोचते थे कि जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का सामना बाद में करना होगा। हालांकि, अब हम बदलाव होते देख रहे हैं और ये बदलाव बहुत तेजी से हो रहे हैं। भारत ने अनाज के मामले में आत्मनिर्भरता हासिल कर ली है, लेकिन वह अब भी दाल, तिलहन और फलों जैसे कुछ बागवानी उत्पादों का आयात करता है।