नई दिल्ली, [स्पेशल डेस्क]। इराक से अब इस्लामिक स्टेट आतंकवादी गुट का लगभग खात्मा हो चुका है। हालांकि अब भी बार-बार उसके सिर उठाने की खबरें आती रहती हैं, जिसमें वह निर्दोषों की जान लेता रहता है। ISIS नाम से मशहूर रहे इस आतंकवादी गुट ने इस देश में जमकर तबाही मचायी। इस दौरान इराक में जो भी विदेशी इस आतंकी गुट की पकड़ में आए, उन पर आतंकवादियों ने बेइंतहां जुल्म किए। ऐसे ही जुल्म की भेंट 39 भारतीय नागरिक भी चढ़े, जिनमें से 38 के अवशेष लेकर विदेश राज्यमंत्री वीके सिंह सोमवार को स्वदेश लौटे। बगदाद एयरपोर्ट से विमान ने उड़ान भरी और सबसे पहले अमृतसर में लैंड हुआ। परिजनों के लिए नाउम्मीदी के बीच एक उम्मीद थी कि शायद वे बच निकले होंगे और स्वदेश लौट आएंगे... लेकिन आज सब खत्म हो गया।

सबसे पहले अमृतसर पहुंचे वीके सिंह
इराक में मारे गए 38 भारतीयों के अवशेष लेकर विदेश राज्यमंत्री वीके सिंह सबसे पहले अमृतसर पहुंचे। अमृतसर के बाद वीके सिंह को कोलकाता और पटना भी जाना है। अमृतसर में उन्होंने कहा, 'यह कोई फुटबॉल का खेल नहीं है, राज्य और केंद्र सरकार दोनों संवेदनशील हैं, विदेश मंत्रालय ने पीड़ित परिवार से सदस्यों का विवरण देने को कहा था, जैसी जिसकी योग्यता होगी उसके आधार पर नौकरी आदि दी जाएगी। हम मामले की समीक्षा करेंगे।' पंजाब सरकार ने मारे गए लोगों के परिजनों को 5 लाख रुपये का मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने का ऐलान किया है। वीके सिंह ने कहा, 'बहुत मुश्किल से मृतकों का डीएनए सैंपल मैच हुआ है। ट्रेंड लोगों ने पूरी ताकत झोंककर मृतकों के डीएनए सैंपल मैच कराए हैं। यह काफी मुश्किल काम था। भारत सरकार की तरफ से कोई कसर नहीं छोड़ी गई थी। मैं चार बार इराक गया था। इसके बाद भारतीयों के अवशेष लाए जा सके हैं।'

मृतकों में सबसे ज्यादा नागरिक पंजाब के
इराक में मारे गए जिन नागरिकों के अवशेष लेकर विदेश राज्यमंत्री जनरल वीके सिंह सोमवार को अमृतसर पहुंचे हैं, उनमें से सबसे ज्यादा 27 लोग पंजाब के थे। हिमाचल प्रदेश के भी चार लोग मृतकों में शामिल हैं, जिनके अवशेष अमृतसर हवाई अड्डे पर उतारे गए। इसके अलावा 6 व्यक्ति बिहार और दो बंगाल के नागरिक थे। अमृतसर के बाद जनरल सिंह कोलकाता और पटना जाएंगे। जानकारी के मुताबिक 39वें शव के डीएनए सहित अन्य जांच की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हो पाई है। ऐसे में इसके लिए बाद में फिर से कोशिश की जाएगी।

2014 से इराक में लापता थे सभी 39 भारतीय
जब इस्लामिक स्टेट का आतंक अपने चरम पर था तो उस वक्त मोसुल उसके लिए एक किले के समान था। उस वक्त यानी 2014 से ही 39 भारतीय लापता थे। पिछले चार साल से इन सभी के परिवारजन किसी अनहोनी के डर से चिंता में तो थे, लेकिन वे उम्मीद जता रहे थे कि शायद वे ISISआइ के चंगुल से छूट गए हों। पिछले दिनों जब विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने उनके मारे जाने की घोषणा की तो परिवारजनों के सब्र का बांध टूट गया। सभी परिवारों में मातम छा गया।

इस शख्स ने पहले ही बता दिया था
बता दें कि सभी 39 भारतीयों को इराक ले जाने वाले हरजीत मसीह ने करीब 4 साल पहले ही दावा किया था कि सभी 39 भारतीयों को इस्लामिक स्टेट के आतंकवादियों ने मार दिया है। मसीह ने दावा किया था कि उसके सामने ही आतंकियों ने सभी को मार दिया था। उसने बताया था कि वह किसी तरह से आतंकियों के चंगुल से छूटकर भाग गया था। हालांकि मसीह के पास अपने दावों की पुष्टि के लिए कोई सुबूत नहीं थे।

खुदाई के दौरान मिले शव

सुषमा स्‍वराज ने पिछले दिनों राज्‍यसभा में जानकारी देते हुए बताया था कि यह सभी शव मोसुल में एक ऊंचे टीले में खुदाई के बाद निकाले गए, जिसके बाद इनकी शिनाख्‍त के लिए इन सभी का डीएनए टेस्‍ट किया गया था। 39 में से 38 का डीएनए पूरी तरह से मैच हो गया था, जबकि एक का 70 फीसद डीएनए मैच हुआ था।

सरकार बनने के 20 दिन बाद सामने आया मामला
बता दें कि साल 2014 में केंद्र में नरेंद्र मोदी की सरकार बनने के 20 दिन बाद सामने आया यह सबसे बड़ा मुद्दा था। इसको लेकर उस वक्‍त भारत सरकार ने इराकी सरकार से संपर्क भी साधा था, लेकिन लापता भारतीयों के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पायी थी। इसके बाद विदेश राज्य मंत्री जनरल वीके सिंह ने इराक का दौरा भी किया था। उन्‍होंने उस वक्‍त इराक के एनएसए से मिली जानकारी के आधार पर आशंका जताई थी कि सभी लापता भारतीय नागरिक ISIS की जेल में कैद हो सकते हैं। उस वक्‍त इन सभी भारतीयों के जिंदा होने की बात कही गई थी।

मोसुल से ISIS के सफाए के बाद वीके सिंह ने किया दौरा
जुलाई 2017 में जब इराकी फौज ने मोसुल से ISIS को खदेड़ दिया था, तब विदेश राज्य मंत्री जनरल वीके सिंह लापता भारतीयों की जानकारी लेने इराक भी गए थे। उस वक्‍त उन्‍होंने सदन को इस बारे में जानकारी देते हुए बताया था कि पूर्वी मोसुल को पूरी तरह ISIS से आजाद करवाने के बाद भी वहां सुरक्षा कारणों से इलाके में प्रवेश पर प्रतिबंध लगा हुआ है। इसकी वहज से लापता भारतीयों के बारे में कोई पुख्‍ता जानकारी नहीं मिल सकी है। इसी दौरान वीके सिंह ने लापता भारतीयों के परिजनों से मुलाकात कर उन्‍हें आश्‍वासन भी दिया था।

नहीं होगी फाइल बंद
इसके बाद 6 जुलाई को सुषमा स्‍वराज ने भी सदन में कहा था कि उनके लिए यह कहना बेहद आसान है कि सभी भारतीय मारे जा चुके हैं। लेकिन हकीकत ये है कि उन्‍हें इस बारे में अभी कोई पुख्‍ता सूचना नहीं है। लिहाजा भारत सरकार सभी भारतीयों को जिंदा मानते हुए आगे बढ़ रही है। जब तक इस बारे में कोई पुख्‍ता सूचना नहीं मिलती है तब तक सरकार इस फाइल को बंद नहीं करने वाली है।

सुषमा स्वराज का वो बयान
26 जुलाई 2017 को भी सुषमा ने अपने इसी बयान को सदन में दोहराया था और कहा था कि भारतीयों के मोसुल में न तो मारे जाने की कोई खबर है और न ही जिंदा होने की। गौरतलब है कि साल 2014 में आतंकी संगठन ISIS ने इराक के मोसुल पर कब्जा कर लिया था, जिसके बाद वहां काम कर रहे करीब 39 भारतीयों के लापता होने की जानकारी सामने आई थी। जुलाई 2017 में ही इराक के विदेश मंत्री भारत के दौरे पर आए थे। उस वक्‍त उन्‍होंने लापता भारतीयों की जानकारी के लिए हर संभव मदद का आश्‍वासन दिया था।

Posted By: Digpal Singh

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस