जयप्रकाश रंजन, नई दिल्ली। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की तरफ से इराक में अगवा भारतीयों की मौत पर विस्तृत बयान और प्रेस कांफ्रेंस के बावजूद इस पूरे प्रकरण से जुड़े कई ऐसे मुद्दे हैं जिनका जवाब नहीं मिल पाया है। मसलन, भारत सरकार को इनकी मौत के बारे में पहली बार ठोस जानकारी कब मिली? क्या आइएस की तरफ से भारतीय अधिकारियों से फिरौती लेने के लिए कभी संपर्क साधा किया गया था? इन भारतीयों की हत्या कब हुई? क्या इनके हत्यारों को कभी सजा भी दिलाई जा सकेगी? अगवा भारतीयों में से बच कर आये हरजीत मसीह के बातों पर क्यों भरोसा नहीं किया गया? विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने भी इनमें से अधिकांश सवालों का सीधा जवाब नहीं दिया।

सरकार की तरफ से मंगलवार को यह दावा किया गया कि मृतकों के शवों को उनके परिवारों को सौंप कर मामले का अंत हो जाएगा। जबकि मान्यता के मुताबिक जब तक हत्यारे को उसके कृत्य की सजा न दिलाई जाए तब तक मामले का अंत नहीं माना जाता। इस बारे में जब सवाल पूछा गया तो स्वराज का जवाब था कि, ''वहां सिर्फ भारतीय नहीं मारे गये, आइएस के हाथों कई देशों के नागरिकों की हत्या हुई है। बड़े पैमाने पर वहां सामूहिक कब्र मिली है। लेकिन सरकार किसके खिलाफ कार्रवाई करे। किसी को यह भी पता नहीं है कि इन भारतीयों की हत्या किसने की है।'' सरकार को अभी इस बात की भी कोई सूचना नहीं है कि इन्हें किस तरह से मारा गया। स्वराज के मुताबिक संभवत: जब डीएनए मिलान की रिपोर्ट मिली तो उसमें इस बात का कुछ ब्यौरा मिला।

सरकार की तरफ से यह भी नहीं बताया जा सका है कि जब पहली बार इन भारतीयों के अगवा होने की सूचना सामने आई तो क्या आधिकारिक तौर पर आइएस से संपर्क साधने की कोशिश की गई थी या नहीं। भारत सरकार को संभवत: 07 जून, 2014 को इराक स्थित दूतावास से इनके अगवा होने की सूचना मिली थी। इसके बाद 19 जून, 2014 को नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रेस को बताया था कि अगवा भारतीयों को कहां रखा गया है उसके बारे में जानकारी मिल गई है और बातचीत के माध्यम से उन्हें छुड़ाने की कोशिश की जा रही है। यह भी बताया गया कि सुरक्षा वजहों से उनकी जानकारी नहीं दी जा रही है। सरकार ने अगवा भारतीयों के परिजनों को आश्वासन दिया कि उन्हें जल्द ही सुरक्षित लाया जाएगा।

इराक के जिस हिस्से में ये शव मिले हैं वह आतंकी संगठन आइएस के कब्जे में था। आइएस को वहां से जून, 2017 में भगाया गया था। उसके बाद ही भारत सरकार की पहुंच हो सकी। अगवा भारतीयों में से बच कर आये हरजीत मसीह की बातों पर भरोसे के बारे में स्वराज का कहना है कि सरकार बगैर ठोस सबूत के कोई दावा नहीं कर सकती। मसीह एक व्यक्ति है वह दावा कर सकता है कि किसी की हत्या हुई है लेकिन सरकार सबूत के आधार पर ही यह दावा कर सकती है।

 

Edited By: Kishor Joshi