माला दीक्षित, नई दिल्ली। एक दिन पहले ही चुनाव आयोग में बड़ी जीत हासिल कर चुके अखिलेश यादव ने अदालती पेशबंदी के जरिए यह सुनिश्चित कर लिया है कि चुनाव के बीच पिता मुलायम सिंह और चाचा शिवपाल यादव का कोई पैंतरा अडंगा न बन जाए। यही कारण है कि चुनाव आयोग से जीत की खबर आते ही वे एक तरफ तो पिता से मिलने उनके घर पहुंचे लेकिन दूसरी ओर उन्होंने अदालत का भी दरवाजा खटखटाने की तैयारी कर दी। मंगलवार की सुबह सुप्रीमकोर्ट में कैविएट दाखिल कर दी ताकि अगर मुलायम खेमा याचिका दाखिल करे तो उनका पक्ष सुने बगैर अदालत एकतरफा कोई आदेश पारित न कर दे। दस्तावेजी पुख्तगी के बल पर चुनाव आयोग से जीत हासिल करने वाले अखिलेश कानूनी लड़ाई में एक भी कड़ी ऐसी कमजोर नहीं छोड़ना चाहते जिससे उनकी साइकिल के रुकने की आशंका बने।

अखिलेश की समाजवादी पार्टी ने सोमवार की सुबह वकील एमआर शमशाद के जरिये सुप्रीमकोर्ट में कैविएट दाखिल की। जिसमें कहा गया है कि कोर्ट उनका पक्ष सुने बगैर इस मामले में कोई भी आदेश पारित न करे। समाजवादी पार्टी की ओर से कैविएट पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव राम गोपाल यादव की ओर से दाखिल की गई है। किसी भी मामले में कैविएट दाखिल होने का मतलब है कि अगर दूसरा पक्ष याचिका दाखिल करेगा तो उस याचिका की प्रति कैविएट दाखिल करने वाले पक्ष को दी जाएगी और मामले पर सुनवाई में कोर्ट कोई भी फैसला देने से पहले याचिकाकर्ता के अलावा कैविएटर का भी पक्ष सुनता है।

मामले में एकतरफा आदेश नहीं होता। इसलिए दूरगामी परिणाम वाले महत्वपूर्ण मामलों में निचली अदालत या किसी अथारिटी से जीत हासिल करने वाली पार्टी उच्च अदालत या सर्वोच्च अदालत में पहले कैविएट दाखिल कर देती है ताकि उच्च अदालत में उसकी गैरमौजूदगी में एकतरफा ऐसा आदेश न हो जाए जिससे उसके हित प्रभावित होते हों। पल पल बदलती परिस्थितियों में उनकी तरफ से की गई कानूनी पेशबंदी दुरुस्त है। राजनीति चूक में विश्वास नहीं करती वो भी उस समय जब चुनाव की भेरी बज चुकी हो। उधर मुलायम खेमे से फिलहाल याचिका दाखिल करने की किसी तैयारी की खबर नहीं आ रही है लेकिन उस खेमे में अखिलेश खेमे की कैवियेट को लेकर उत्सुक्ता जरूर बनी रही।

Posted By: Sachin Bajpai

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