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वायु प्रदूषण से बढ़ सकता है आत्महत्या का खतरा, रिसर्च में बड़ा दावा

Published: Wed, 16 Sep 2026 11:52 PM (IST)

वायु प्रदूषण के संपर्क में रहने से आत्महत्या और आत्मघाती विचारों का खतरा बढ़ सकता है, जिसमें पीएम2.5, पीएम10 और नाइट्रोजन डाईऑक्साइड प्रमुख प्रदूषक हैं।

वायु प्रदूषण से बढ़ सकता है आत्महत्या का खतरा।

वायु प्रदूषण से बढ़ सकता है आत्महत्या का खतरा।

HighLights

  1. वायु प्रदूषण से आत्महत्या और आत्मघाती विचारों का खतरा बढ़ता है।

  2. पीएम2.5, पीएम10 और एनओ2 प्रमुख जोखिम वाले प्रदूषक हैं।

  3. आत्महत्या रोकने की रणनीतियों में पर्यावरणीय जोखिमों पर ध्यान दें।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। वायु प्रदूषण के संपर्क में रहने से आत्महत्या व आत्मघाती विचारों का खतरा बढ़ सकता है और पीएम2.5, पीएम10 तथा नाइट्रोजन डाईआक्साइड (एनओ2) सबसे अधिक जोखिम वाले प्रदूषक माने गए हैं। अब तक हुए अध्ययनों की समीक्षा से जानकारी मिली।

शोधकर्ताओं का कहना है कि ‘जर्नल ऑफ एपिडेमियोलाजी एंड कम्युनिटी हेल्थ’ में प्रकाशित इस अध्ययन के निष्कर्ष बताते हैं कि आत्महत्या की घटनाओं को रोकने की रणनीतियां तैयार करते समय पर्यावरण से जुड़े उन जोखिमों पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए, जिन्हें कम किया जा सकता है।

ब्रिटेन की ‘क्वीन्स यूनिवर्सिटी बेलफास्ट’ के अनुसंधान दल ने 29 अध्ययनों के नतीजों का विश्लेषण किया, जिनमें वायु प्रदूषण के संपर्क में आने से आत्महत्या और आत्मघाती विचारों पर पड़ने वाले प्रभाव को देखा गया।

शोधकर्ताओं ने कहा कि व्यक्तिगत, जैविक और परिस्थितिजन्य कारकों के आपसी मेल को देखते हुए आत्महत्या की घटनाएं रोकने को केवल मानसिक स्वास्थ्य का विषय नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य का मुद्दा भी माना जाना चाहिए।

हालांकि, पर्यावरणीय जोखिमों और अवसाद व चिंता जैसी मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के बीच संबंध पर काफी शोध हुआ है, लेकिन आत्महत्या के जोखिम में पर्यावरणीय कारकों की भूमिका के बारे में अब तक अपेक्षाकृत कम जानकारी उपलब्ध है।

शोधकर्ताओं ने कहा कि उनके विश्लेषण में पीएम2.5 और पीएम10 के अल्पकालिक संपर्क तथा पीएम2.5 और एनओ2 के लंबे समय तक संपर्क का आत्महत्या, आत्महत्या के प्रयास और आत्मघाती विचारों के बढ़ते जोखिम से महत्वपूर्ण संबंध सामने आया।

(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)