लंदन, प्रेट्र। शोधकर्ताओं ने आगाह किया है कि भारत के घनी आबादी वाले इलाकों में वायु प्रदूषण के कारण हृदय से जुड़ी बीमारियों और स्ट्रोक का खतरा बढ़ गया है। उनके अध्ययन के नतीजे बताते हैं कि जहरीली हवा में मौजूद सूक्ष्म कणों का प्रभाव पुरुषों पर ज्यादा होता है। खासतौर पर 40 से ज्यादा उम्र के पुरुषों पर।

स्पेन के बार्सिलोना इंस्टीट्यूट फॉर ग्लोबल हेल्थ का यह अध्ययन इंटरनेशनल जर्नल ऑफ एपिडेमियोलॉजी में प्रकाशित हुआ है। 3,372 लोगों पर किए गए इस अध्ययन में पहली बार पता लगाया गया कि निम्न और मध्यम आय वाले देशों के घनी आबादी वाले इलाकों में प्रदूषण के बढ़े स्तर से कैरोटिड इंटीमा मीडिया थिकनेस (CIMT) यानी धमनियों के पतलेपन को मापने वाला सूचक बढ़ जाता है।

हृदयाघात और स्ट्रोक का खतरा ज्यादा

हैदराबाद के उपनगरीय इलाकों में किए गए इस अध्ययन के नतीजों के मुताबिक प्रदूषण के सूक्ष्म कणों के संपर्क में आने वाले लोगों में CIMT सूचकांक काफी उच्च होता है। इसका अर्थ है कि ऐसे लोगों में हृदयाघात और स्ट्रोक का खतरा ज्यादा होता है।

CIMT का स्तर पाया गया अधिक

अध्ययन में शामिल किए गए करीब 60 फीसदी लोगों ने खाना पकाने के लिए जैव ईधन का प्रयोग किया था। ऐसे लोगों में CIMT का स्तर अधिक पाया गया। खासतौर पर उन महिलाओं में जो कम हवादार जगहों पर खाना बनाती हैं।

गौरतलब है कि देश की राजधानी दिल्ली में पिछले कई दिनों से वायु प्रदूषण लगातार खराब श्रेणी में बना हुआ है। सोमवार सुबह दिल्ली के लोधी रोड इलाके में वायु गुणवत्ता सूचकांक (Air Quality Index) के मुताबिक, दिल्ली के लोधी रोड इलाके में पीएम 2.5 का स्तर 251 तो पीएम 10 का तसर 232 रहा। जिसे खराब श्रेणी में माना जाता है और यह स्वास्थ्य के लिहाज से भी बेहद खतरनाक है।

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